मैं मनुआ के साथ आज नयामोड़ में होने वाली मीटिंग की तैयारी के बावत चर्चा ही कर रहा था कि अचानक पांडे आ टपका ।
" देखा , साहब ने दोनो को निकाल बाहर कर दिया न ...चोट्टे , चले थे सरकार को बदनाम करने ....।"
" ठीके बोले पांडे भइया -- चोट्टे । बाकि ई चोट्टन को बहाल साहबे ने किया था भइया ...एकठो जो सीबीआई में कबहूँ काम नहीं किये रहे ,उनको हेड बना दिया और दूसरका पर पाँच - छः ठो भ्रष्टाचार के मुकदमा चल रहा था , उसे उनके नीचे बिठा दिया । "
" दूर बुड़बक , आरोपिए न था ...उसमें का गलती किये ...सब पीएम अप्पन पसंद के अफसर सीबीआई में बिठाते हैं ....। "
" बिठाते ही हैं भइया , ताकि विरोधियों का गर्दन जब चाहे मरोड़ दें ...और ई दूनो साहब तो ईहे करिए रहे थे ...उधर साहब के दोस्तों को चिकनिया पार करा रहे थे ....वरना मजाल था कि माल्या, नीरव और चौकसिया फुर्र हो जाते । "
" लो , अब उसका ठीकरा भी साहबे के माथे पर फोड़ोगे का ? ऊहे कह दीहिन कि ऊ लोगन को भगवा दो ...ऊहे कह दीहिन कि कुरैशिया से दू - चार करोड़ लेके उसको क्लीन चीट दे दो ? तू भी न गजबे थेथरई करता है । "
" हम ई कहाँ कह रहे हैं भइया , बाकि शाह जी के केसवा आगे कोर्ट मे काहे न बढ़ा ...गुजरात में रहके अस्थाना जी साहब के अंगुरिया पर केतना नाचे हैं , ऊ अब ढँकल-छुपल न है भइया । और जब नाचे हैं , तो काम का दाम लेबे न करेंगे ....ले लीहीन सीबीआई के ईस्पेशल डिरेक्टर की कुर्सी ...और लगीन माल कमाने...। "
" देख मनुआ , जब तू लोग इधर साहेब के खिलाफ कुछ नहीं पाता है , तो दौड़ जाता है गुजरात....। "
" अरे , नहीं भइया , अब तो इधरो खच्चा भर के मैटीरियल साहेब थमा दिये हैं ..... ऊ में सबसे ताजा राफेलवा में दलाली वाला मामला है ...। "
" राफेलवा में कौनो दलाली का मामला नाहीं है ....तू लोग चीन - पाकिस्तान को फायदा पहुँचाने के लिए चाहते हो कि पूरा डील सार्वजनिक हो जाए ....। "
" हँसी आती है भइया ई सोच पर ...का साहेब और उनके दल के लोगन को छोड़कर सभे लोग देशद्रोही है ? और ई कौन कह रहा है कि राफेलवा के तकनीकवा बताइए ...अरे बाकी चीजवा तो बताइए ...ऊ भी सबको नहीं , तो कम से कम जेपीसी को हीं बता दीजिए ..। "
" अब तुम लगा राजनीति बतियाने ....जेपीसी ....ईहे न तू लोग माँग कर रहा है .....।" -- कहते हुए पांडे उठा और चल दिया ।
मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र! सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं। इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...
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