मनुआ - 68 " अरी , सुनती हो...? ", घर में घुसते ही मनुआ ने पत्नी को आवाज दी। " हाँ, सुनती हूँ...अभी बहरी न हुई हूँ...!....का हुआ, बहुते खुश नजर आ रहे हो? " -- पत्नी ने तवे पर रोटी पलटते हुए पूछा । " आज मोदी जी ने गजबे संदेश दिया है....। " " फिर नोटबंदी - वोटबंदी कर दिया का ? " , पत्नी ने बीच में ही बात काटते हुए कहा । दरअसल नोटबंदी के समय उसके बक्से में हजार हज़ार के तीन नोट साड़ी के तह में छिपे रह गए थे , जिन्हें वह बदल नहीं पाई थी। उस नुकसान के लिए वह मोदी जी को आज भी दोषी मानती है । " अरे, नहीं .... ऊ बात नहीं है। आज ऊ बोलिन है कि साल भर देश के लोग सोना या सोने का गहना न खरीदें......! " " वैसे कौन सा लोग रोज सोना खरीद रहे हैं। घर में भुंजी भांग न, ड्योढ़ी पर नाच। उनको न मालूम है कि लोग 5 किलो अनाज पर जीवन खेप रहे हैं ! " " एतने न , बोलिन है कि दाल - सब्जी में कम से कम तेल खर्चा करें। " " वैसे भी ई महंगाई में किसके चौका में छनर - मनर हो रहा है ? दो बूंद से दाल छौंका रहा है और चार बूंद से सब्जी। इनके राज...
मनुआ - 67 पांडे ने मनुआ को देखते ही चहकते हुए कहा -- " का रे मनुआ ! देखा, मोदीजी ने बंगालो दखल कर लिया। एक समय का लाल दुर्ग आज गेरुआ दुर्ग बन गया रे ! " " लाल से गेरुआ नहीं हुआ है, भइया! सबुज से गेरुआ हुआ है। लाल जब तक था , तब तक एगो सीट के लिए ई लोग तरसते थे। " " ऊ तो ठीक है। लेकिन तुमलोग तो केरलम भी हार गया। माने पूरे देश से साफे न हो गया ! " " हम साफ होने वाले नहीं हैं, भइया ! हम तो तब तक रहेंगे जब तक ई धरती पर अन्याय, अत्याचार और शोषण का समराज रहेगा। देख रहे हैं न... पानेसर, गुड़गांव से लेकर नोएडा तक मजदूरों के शोषण के खिलाफ कौन सड़क पर लड़ रहा है...! " " अरे, ऊ सब से कुछ होने वाला है। मोदीजी के सामने सब टांय टांय फिस्स हो जाएगा। " ---पांडे ने गर्व से हंसते हुए कहा। " एतना घमंड भी ठीक नहीं है, भइया ! एक बार शोषित - पीड़ित जनता जब जाग जाती है, तब बड़ा से बड़ा सामराज भी ढह जाता है। " " दूर बुड़बक ! तुम लोग अभियो समाजेवाद का सपना देख रहा है जबकि पूरी दुनिया से तुम्हारा सफाया हो गया ....। " " सफाया...