मकान और घर
एक मकान वह था
जहाँ मेरा बचपन बीता
अभाव ही अभाव था
गरीबी थी
मुफलिसी थी
भूख थी
पर, रोटी नहीं
नींद थी
पर, बिस्तर नहीं
दीवार में दरार थे
पर दिलों में प्यार था
सद्भाव था
सहयोग था
साझा सपने थे
साझा प्रयास था
चैन था, सुकून था
वह मकान नहीं
हमारा घर था.
दूसरा मकान
जहाँ रहता हूँ अब
मजबूत दीवारें
लोहे का बड़ा फाटक
गैरज में लाखों की गाड़ी
सोफे, कुर्सियां, खाने का मेज
बड़ी - बड़ी आलमारियां
जरूरत की सारी चीजों से भरी हुईं
आधुनिक कीचन
तरह - तरह के व्यंजन
पर, भूख नहीं
गद्देदार बिस्तर
पर, नींद नहीं
बिखरे हुए सपने
टूटे हुए अरमान
चारो ओर खालीपन
दूर तक पसरा सन्नाटा
जीवन बोझ सा लगता है
यह मकान बड़ा भले ही है
अपना घर नहीं लगता है .
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