मनुआ - 64
12 फरवरी, 26 को चार लेबर कोड के खिलाफ आहूत अखिल भारतीय हड़ताल को सफल बनाने के लिए हुई गेट मीटिंग से लौटकर मनुआ अभी घर के दरवाजे पर पहुंचा ही था कि पांडे सामने से आते दिखा। पास आते ही मनुआ ने चुटकी ली --- " पुतला दहन करके आ रहे हैं का, पांडे भइया ? "
" पुतला दहन...? कइसा पुतला दहन..? ई सब काम तो तुमलोगों का है...लेकिन ई सरकार पीछे हटने वाली न है बबुआ , लेबर कोड तो लागू होके ही रहेगा " --- पांडे ने हंसते हुए कहा।
" ई लो....शहर के बीचोबीच चौराहे पर चार - चार मंत्री लोग का पुतला दहन हुआ और इनको कुछ....। "
" कवन मंत्री लोग का...? हमको सच्चे न मालूम है, मनुआ ! "
" आपके प्रिय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कानून मंत्री और शिक्षा मंत्री का...। "
" अच्छा...! अइसा कौन बेवकूफ लोग कर रहा है...? "
" खांटी मोदी भक्त .... हाँ भइया! खांटी भक्त और सनातनी लोग ...! " -- मनुआ ने मजाक के लहजे में मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
पांडे को उसकी बातों पर विश्वास न हो रहा था । भला मोदी भक्त मोदी जी का पुतला जलायेंगे ! मनुआ का कटाक्ष उसके दिल को छलनी कर गया ।
" अब ई न पूछिएगा भइया कि ई सब हो क्यों रहा है ? "
" अरे, पूछना का है! कुछ ऐसा किहिन होंगे, जो ई लोगन के समझे में न आ रहा होगा , काहे कि मोदीजी बहुत दूर की कौड़ी खेलते हैं। अइस ही न तीन - तीन बार प्रधानमंत्री बन गए ! उनके, ऊ का कहते हैं.....मास्टर स्ट्रोक , उसको समझना आसान नहीं है, बबुआ ! वैसे, ऊ किहिन का है, ई तो बताओ ? "
" कालेज... विश्वविद्यालय में जाति के लेके जे भेदभाव होता है न, ओकर विरोध में एक ठो कनून लाईन हैं .. पहिले वाले कनूनवा में खाली एससी - एसटी के साथ भेदभाव पर रोक के बात था, ई में पिछड़ी जातियों को भी जोड़ दीहिन हैं.... बस सवर्ण लोग भड़क गए हैं । उनका कहना है कि ई कनून उनके खिलाफ है। "
" अरे, वाह! ई तो बहुते बढ़िया काम किहिन है। यूपी में अखिलेश यादव बड़ी पीडीए.. पीडीए कर रहे थे... अब लग जाएगा सेंध उनके पीडीए में...। "
" तब ई लोग काहे चीख - चिल्ला रहे हैं, भइया ? "
" बुड़बक लोग है, और का ! मोदीजी को समझना इतना आसान थोड़े न है ! ऊ एके तीर से कई ठो शिकार करते हैं । देखा न, एने आरक्षण का झुनझुना लोग बजाते रह गए , उधर ऊ सब सरकारी नोकरी प्राइवेट कर दीहिन...। "
" अइसा होने से आपको भी तो नुकसान हुआ न भइया ! "
" हुआ तो हुआ, देश में समाजिक समरसता तो बना रहा। सनातन धर्म का रक्षा तो हुआ । जय सनातन....जय श्रीराम !! "
नारा लगाते हुए पांडे चला गया। मनुआ ठगा सा उसे जाता देखता रहा और सोचता रहा कि अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारकर भी लोग खुश कैसे होते हैं !
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