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एक नई दुनिया की नींव

एक नई दुनिया की नींव

काश!
हम सुन - समझ पायें
धरती की पुकार
आकाश का आर्तनाद
प्रकृति का रुदन 
पशु - पक्षियों ,वृक्षों का
करुण क्रंदन

काश !
हम निकल पायें 
अज्ञानता के
 घुप्प अंधकार से
अंधविश्वास के 
अंतहीन सुरंग से

काश !
हम लड़ पायें 
धार्मिक पाखंड से 
छल - प्रपंच से उपजे
झूठे प्रलाप से
काम - क्रोध - लोभ - तृष्णा से
अपने अंदर छिपे
मोह - माया से
सब कुछ 
खुद के लिए 
पाने की जिद्द से
काश !
हम बचा पायें सबको
अपने अंदर पल रहे
सर्वभक्षी गीद्ध से 

काश !
यह एकांतवास
दे हमें एक नई प्रेरणा
एक नई दृष्टि
 विश्व दृष्टि 
कि हम व्यष्टि को
करें समाहित समष्टि में,
कि करें हम
एक नई शुरुआत 
भूलकर सब राग - द्वेष
हरें हम सबका क्लेश 
पुरानी दुनिया के
ध्वंसावशेष पर
डालें हम नींव
 एक नई दुनिया की
               ---- कुमार सत्येन्द्र




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