जननी हूँ , जनती हूँ
प्रसव वेदना सहती हूँ
माता हूँ , बेटी हूँ
बहना हूँ ,चेटी हूँ
दादी हूँ ,नानी हूँ
घर की मैं स्वामिनी हूँ
फिर भी बेचारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
मेरे जने बेटों ने
स्वार्थवश तोड़ा है
कई कई नाम देकर
रिश्तो में जोड़ा है
रिश्ते सब झूठे हैं तब
जब मैं गणिका हूँ
रोती हूँ हँसती हूँ
घुट-घुट कर जीती हूँ
महफ़िल की मल्लिका हूँ
फिर भी दुखियारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
मेरे हैं नाम कई
मेरे हैं रूप कई
सूर्पनखा मैं ही हूँ
मैं ही कहीं सीता हूँ
कुल की कलंकिनी हूँ
पावन पुनीता हूँ
ममता की दरिया हूँ
फिर भी मैं रीती हूँ
द्रौपदी हूँ ,कुंती हूँ
मैं ही गन्धारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
सदियों से बांदी हूँ
सोना हूँ चांदी हूँ
आबरू हूँ अस्मत हूँ
घर की मैं इज्जत हूँ
परदे में रहती हूँ
कोठे पर बिकती हूँ
सदा ही सुहागिन हूँ
फिर भी अभागिन हूँ
सारा सुख पाकर भी
जीवन मैं हारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
बनाते कानून जो
रचते विधान जो
उन सारे हाथों को
मैंने ही जाया है
वक्त का ही फेर कहो
दूध नहीं काम आया
तभी तो कोख ने ही
मुझको तड़पाया है
रोशन शहर की
एक अंधी गलियारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
प्रसव वेदना सहती हूँ
माता हूँ , बेटी हूँ
बहना हूँ ,चेटी हूँ
दादी हूँ ,नानी हूँ
घर की मैं स्वामिनी हूँ
फिर भी बेचारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
मेरे जने बेटों ने
स्वार्थवश तोड़ा है
कई कई नाम देकर
रिश्तो में जोड़ा है
रिश्ते सब झूठे हैं तब
जब मैं गणिका हूँ
रोती हूँ हँसती हूँ
घुट-घुट कर जीती हूँ
महफ़िल की मल्लिका हूँ
फिर भी दुखियारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
मेरे हैं नाम कई
मेरे हैं रूप कई
सूर्पनखा मैं ही हूँ
मैं ही कहीं सीता हूँ
कुल की कलंकिनी हूँ
पावन पुनीता हूँ
ममता की दरिया हूँ
फिर भी मैं रीती हूँ
द्रौपदी हूँ ,कुंती हूँ
मैं ही गन्धारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
सदियों से बांदी हूँ
सोना हूँ चांदी हूँ
आबरू हूँ अस्मत हूँ
घर की मैं इज्जत हूँ
परदे में रहती हूँ
कोठे पर बिकती हूँ
सदा ही सुहागिन हूँ
फिर भी अभागिन हूँ
सारा सुख पाकर भी
जीवन मैं हारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
बनाते कानून जो
रचते विधान जो
उन सारे हाथों को
मैंने ही जाया है
वक्त का ही फेर कहो
दूध नहीं काम आया
तभी तो कोख ने ही
मुझको तड़पाया है
रोशन शहर की
एक अंधी गलियारी हूँ
क्योंकि मैं नारी हूँ
'क्योंकि मैं नारी हूँ' लिखने केलिय दुनिया की नारियां मर गई हैं क्या?
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