किसने क्या खोया - किसने क्या पाया
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तुम्हारी मौत की बरसी पर
फिर छलके हैं आंसू ,
खौफ के साये में
चेहरों की उदासी
और भी हो गई है गहरी .
पर दादी की गोद में
हुमक रहा है
छोटा सचिन
उधर नन्हा शाहनवाज़
खेल रहा है
दादा की सफ़ेद दाढ़ी से
बेखौफ होकर .
वे फिर आये हैं
सफ़ेद लिवास में
काली गाड़ियों पर सवार
जिन्होंने सेंकी थीं रोटियां
तुम्हारी चिता की आग पर
और पढ़ा था स्यापा
तुम्हारे कब्र पर
सफ़ेद लिवास में
काली गाड़ियों पर सवार
जिन्होंने सेंकी थीं रोटियां
तुम्हारी चिता की आग पर
और पढ़ा था स्यापा
तुम्हारे कब्र पर
पर ,
क्या तुम जान पाओगे
किसने क्या खोया -किसने क्या पाया ?
क्या तुम जान पाओगे
किसने क्या खोया -किसने क्या पाया ?
अस्थिपंजर सी हिलती
तुम्हारी माँ
बेजुबां शून्य में निहारते
तुम्हारे पिता
अब भी बाट जोहती
तुम्हारी बहन
क्या कहें , किससे कहें ?
कौम के सरमायदारों ने
कर दी है बात
कौम की इज्जत की
कौम की आबरू की
कौन जायेगा भला
कौम के खिलाफ ?
तुम्हारी माँ
बेजुबां शून्य में निहारते
तुम्हारे पिता
अब भी बाट जोहती
तुम्हारी बहन
क्या कहें , किससे कहें ?
कौम के सरमायदारों ने
कर दी है बात
कौम की इज्जत की
कौम की आबरू की
कौन जायेगा भला
कौम के खिलाफ ?
गगनभेदी नारों से
गूंजता आकाश
बढ़ता ही जा रहा
सरमायदारों का कद
सियासत के गलियारों में
उनकी पहुँच
गूंजता आकाश
बढ़ता ही जा रहा
सरमायदारों का कद
सियासत के गलियारों में
उनकी पहुँच
पर,
क्या तुम कभी जान पाओगे
किसने क्या खोया -किसने क्या पाया ?
क्या तुम कभी जान पाओगे
किसने क्या खोया -किसने क्या पाया ?
इधर तुम्हारे गाँव
हो गए हैं तब्दील
श्मशान - कब्रिस्तान में
जहाँ चीखती है खामोशी
और हवा है
नफ़रत से लबरेज़
खेतों में उग आये हैं
फसलों की जगह
खंजर और तमंचे
भयभीत परिंदों ने भरी है
लम्बी उड़ान
अब वे शायद कभी न लौटें
पर,
शिकारियों ने जमा लिए हैं पांव
तुम्हारे गाँव में
हो गए हैं तब्दील
श्मशान - कब्रिस्तान में
जहाँ चीखती है खामोशी
और हवा है
नफ़रत से लबरेज़
खेतों में उग आये हैं
फसलों की जगह
खंजर और तमंचे
भयभीत परिंदों ने भरी है
लम्बी उड़ान
अब वे शायद कभी न लौटें
पर,
शिकारियों ने जमा लिए हैं पांव
तुम्हारे गाँव में
अब वे बोयेंगे
नफ़रत के बीज
हर वर्ष
तुम्हारी बरसी पर
और काटेंगे उसकी फसल
हर पांच साल पर,
नफ़रत के बीज
हर वर्ष
तुम्हारी बरसी पर
और काटेंगे उसकी फसल
हर पांच साल पर,
तब क्या तुम जान पाओगे
किसने क्या खोया , किसने क्या पाया ?
--- कुमार सत्येन्द्र
किसने क्या खोया , किसने क्या पाया ?
--- कुमार सत्येन्द्र
वाह भाई।
ReplyDeleteअति सुंदर .ब्लॉग लिखते रहिये
वाह भाई।
ReplyDeleteअति सुंदर .ब्लॉग लिखते रहिये
शुक्रिया खाँ सा'ब !
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