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प्रसंगवश

" आज के हालात में हम देख रहे हैं कि अपने साथ अब भी  हो रहे सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ सामाजिक रूप से पिछड़े तबकों तथा दलितों के बीच जागरूकता बढ़ रही है।यह बहुत ही सकारात्मक लक्षण है।दूसरी ओर हम इस  तरह के प्रयासों का प्रवृति भी देख रहे हैं कि इस बढती हुई जागरूकता को सम्बंधित जातिगत या सामाजिक पहचान के दायरे में ही बांध कर रखा जाये।इस तरह इन तबकों को आज जनतांत्रिक आंदोलनों से काटने की कोशिश की जाती है।इसमें सामाजिक रूप से उत्पीड़ित एक तबके को दूसरे के खिलाफ खड़ा किये जाने का खतरा भी रहता है।इसलिए ये ऐसे नकारात्मक रुझान हैं जो अपने शासन को मजबूत करने के सत्ताधारी वर्ग के प्रयासों को ही मजबूत करेंगे।"    

"मेरे स्वर में भर दो घनगरज
ताकि मैं इस नरभक्षी को लताड़ सकूँ
जिसकी जघन्य भूख
न मां को छोड़ती है ,न बच्चे को "----रवीन्द्रनाथ टैगोर

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हो वर्ष नव

हो वर्ष नव हो हर्ष नव हो ‌‌सृजन नवल हो गीत नया  नव ताल - सुर संगीत नया  नूतन जीवन  हो रंग नया  नव नव विहंग नव नव कलरव नव पुष्प खिलें नव नव पल्लव  हो वर्ष नव हो हर्ष नव हालात नए ललकार नई कर ले स्वीकार  मत मान हार  उम्मीद नई  संकल्प नया  प्रज्ज्वलित कर एक दीप नया  हो तम  विनाश हो तम विनाश हो वर्ष नव हो हर्ष नव --- कुमार सत्येन्द्र

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मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र!  सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों   की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं।  इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...

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