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कन्हैया के भाषण पर टिप्पणी

वर्षों बाद मैंने इतना सारगर्भित और देश प्रेम में पगा भाषण सुना । जी हाँ ! यह भाषण कन्हैया कुमार की है । उसी कन्हैया की जिसे देशद्रोह के तथाकथित मामले में गिरफ्तार किया गया है और जिस पर कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा घेरे के बावजूद हमला हुआ है । उसे अपने देश और उसके संविधान से अटूट प्रेम है । उसमे पूरी आस्था है और उसकी रक्षा वह हर कीमत पर करना चाहता है । वह देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध और कटिबद्ध है। इतना बढ़िया संविधान देने के लिए वह बाबा साहेब के प्रति भी कृतज्ञ है। वह ना केवल अपनी माँ बल्कि हर भारतीय , चाहे वो अमीर हो या गरीब , किसी भी जाति या मजहब का हो , सबकी माँ का अक्स भारत माँ में देखना चाहता है । वह किसी की भी माँ - बहन की तौहीन न खुद करता है और चाहता है कि न कोई और ऐसा करे । भारत की बेहतरीन संस्कृति का इससे बड़ा उदहारण और क्या हो सकता है ? वह अपनी यूनिवर्सिटी से प्यार करता है , तभी उसकी निंदा या तौहीन नहीं बर्दास्त करता । वह चाहता है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बाँटने का केंद्र न हो बल्कि वहां जीवन से सम्बंधित प्रत्येक विषय पर तार्किक और गंभीर बहस हो । वह असहमति के स्वर को न केवल सुनना चाहता है बल्कि उसका सम्मान करना चाहता है । वह चाहता है कि जे एन यु में छात्रों को दी गई सुविधाओं में कोई कटौती न हो । वह जे एन यु की स्वायतता का हिमायती है । वह हर प्रकार के शोषण के खिलाफ है । वह सबकी सम्मान की बात करता है । वह समाज के उन तबकों की लड़ाई लड़ना चाहता है जो सदियों से हाशिये पर पड़े हैं और जिनके साथ आज तक सामजिक भेद - भाव किया जाता है , जिनका हर तरह से शोषण किया जाता है
वह उनसे एकजूटता का इजहार करता है और उनके साथ मिलकर भगत सिंह , सुखदेव , बाबा साहेब अम्बेडकर और अन्य क्रांतिकारियों के सपने को साकार करना चाहता है । वह एक गरीब किसान का बेटा है और उसने बचपन से उपेक्षा और गरीबी से उत्पन्न जहालत को झेल है । इसलिए वह आर्थिक और सामाजिक समानता की बात करता है । वह गरीबी,विषमता और शोषण से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से वाकिफ है , इसीलिए वह उनके खिलाफ जंग का एलान करता है ।
साथियो ! कन्हैया का जो भाषण सोशल मिडिया पर वायरल है , मैंने उसे 3-4 बार सुना है और अपने कई साथियों के साथ भी शेयर किया है । इतनी कम उम्र में इतने परिपक्व विचार ! धन्य हैं वे माता- पिता जिन्होंने देश को ऐसा अनमोल रतन दिया ! धन्य है उस गाँव की मिटटी ! धन्य हैं वे शिक्षक जिनके सान्निध्य ने एक अनगढ़ पत्थर को तऱासा और हीरे का गुण उसमे पैदा किया । उसके विचारों को सुनने के बाद मै दावे के साथ कह सकता हूँ कि कन्हैया कभी अपने देश से , अपने लोगों से द्रोह नही कर सकता। वह बेगुनाह है और यह सच शीघ्र ही हमारे सामने आ जायेगा । अंत में मै इस क्रन्तिकारी नौजवान के जज्बे को सलाम करता हूँ और उसकी शीघ्र रिहाई की कामना करता हूँ ।
इन्कलाब जिंदाबाद !

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