मुलाकात
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संग - संग जन्मे
संग - संग खेले
ख़ुशी और गम
संग - संग झेले
संग - संग पढ़े
संग आगे बढे
विकास के क्रम में
विचारों में फर्क आया
एक के मन में आस्था
दूजे में तर्क आया
तब संग छूटा
दोस्ती भी टूटी
मंजिलें अलग
सो रास्ते अलग ।
समय के एक लम्बे अन्तराल के बाद
फिर हुई मुलाकात
पुराना प्रेम उमड़ा
दोनों गले मिले
हैसियत की कैफियत
कुछ यूँ फिर बयान हुई
देखो,
देखो दोस्त !
मेरे पास आज क्या नही है
बहुराष्ट्रीय कंपनी की चाकरी है
करोड़ों का पैकेज है
सत्ता का साथ है
और मेरे सिर पर
अमेरिका का हाथ है
अख़बारों की सुर्खियाँ मै ही बनाता हूँ
चैनलों की टी आर पी मै ही बढाता हूँ
धर्माचार्यों की भी दया-दृष्टि है
धन-दौलत की हो रही वृष्टि है
साध्वी हैं , साधू हैं और सारे संत हैं
बाबाओं - गुरुओं की संख्या अनंत है
चारो ओर फैली हुई
भक्तों की फौज है
बस समझो यार
मौज ही मौज है !
एक गहरी सोंच में डूब गया दूसरा
फिर धीरे से उसने
अपना मुंह खोला -
मेरे पास !
मेरे पास -
गांधी का सत्याग्रह है
भगत सिंह का सपना है
बाबा साहब का संविधान है
महापुरुषों का आख्यान है
पुरखों की विरासत है
जेल है - हिरासत है
माँ की कराहती आत्मा है
बहनों की जिम्मेदारी है
भाइयों की लाचारी है
बढती हुई महंगाई है
भूख है , बीमारी है
मत पूछो यार !
बस संघर्ष ही संघर्ष है ।
कचरा बन रहे कल-कारखाने हैं
कुछ लुट चुकीं - कुछ लुट रहीं खदाने हैं
कर्ज में डूबकर मरता किसान है
अपनों के ही खंजर से
घायल हिंदुस्तान है
मेरी किस्मत में मौज कहाँ दोस्त !
मेरा तो जीवन ही एक इम्तिहान है
मेरा तो जीवन ही एक इम्तिहान है ।
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