Skip to main content

मुलाकात

मुलाकात
    -------------------
संग - संग जन्मे
संग - संग खेले
ख़ुशी और गम
संग - संग झेले
संग - संग पढ़े
संग आगे बढे
विकास के क्रम में
विचारों में फर्क आया
एक के मन में आस्था
दूजे में तर्क आया
तब संग छूटा
दोस्ती भी टूटी
मंजिलें अलग
सो रास्ते अलग ।

समय के एक लम्बे अन्तराल के बाद
फिर  हुई मुलाकात
पुराना प्रेम उमड़ा
दोनों गले मिले
हैसियत की कैफियत
कुछ यूँ फिर बयान हुई
देखो,
देखो दोस्त !
मेरे पास आज क्या नही है
बहुराष्ट्रीय कंपनी की चाकरी है
करोड़ों का पैकेज है
सत्ता का साथ है
और मेरे सिर पर
अमेरिका का हाथ है
अख़बारों की सुर्खियाँ मै ही बनाता हूँ
चैनलों की टी आर पी मै ही बढाता हूँ
धर्माचार्यों की भी दया-दृष्टि है
धन-दौलत की हो रही वृष्टि है
साध्वी हैं , साधू हैं और सारे संत हैं
बाबाओं - गुरुओं की संख्या अनंत है
चारो ओर फैली हुई
भक्तों की फौज है
बस समझो यार
मौज ही मौज है !

एक गहरी सोंच में डूब गया दूसरा
फिर धीरे से उसने
अपना मुंह खोला -
मेरे पास !
मेरे पास -
गांधी का सत्याग्रह है
भगत सिंह का सपना है
बाबा साहब का संविधान है
महापुरुषों का आख्यान है
पुरखों की विरासत है
जेल है - हिरासत है
माँ की कराहती आत्मा है
बहनों की जिम्मेदारी है
भाइयों की लाचारी है
बढती हुई महंगाई है
भूख है , बीमारी है
मत पूछो यार !
बस संघर्ष ही संघर्ष है ।
कचरा बन रहे कल-कारखाने हैं
कुछ लुट चुकीं - कुछ लुट रहीं खदाने हैं
कर्ज में डूबकर मरता किसान है
अपनों के ही खंजर से
घायल हिंदुस्तान है
मेरी किस्मत में मौज कहाँ दोस्त !
मेरा तो जीवन ही  एक इम्तिहान है
मेरा तो जीवन ही एक इम्तिहान है ।

Comments

Popular posts from this blog

हो वर्ष नव

हो वर्ष नव हो हर्ष नव हो ‌‌सृजन नवल हो गीत नया  नव ताल - सुर संगीत नया  नूतन जीवन  हो रंग नया  नव नव विहंग नव नव कलरव नव पुष्प खिलें नव नव पल्लव  हो वर्ष नव हो हर्ष नव हालात नए ललकार नई कर ले स्वीकार  मत मान हार  उम्मीद नई  संकल्प नया  प्रज्ज्वलित कर एक दीप नया  हो तम  विनाश हो तम विनाश हो वर्ष नव हो हर्ष नव --- कुमार सत्येन्द्र

मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र

मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र!  सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों   की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं।  इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...

पहचान की राजनीति

## पहचान की राजनीति बनाम वर्गाधारित राजनीति। ## पहचान की राजनीति का मतलब क्या है ? उत्तर आधुनिकता की ही तरह पूंजीवादी सिद्धांतों से निकली पहचान की राजनीति मार्क्सवाद का विकल्प होने का दावा करती है। यह मानती है कि राजनीति और भौतिक परिस्थितियों के बीच कोई रिश्ता नहीं होता। यह एक ऐसे समाज की परिकल्पना करती है जो तमाम तरह के शोषण और आपसी शत्रुता पर टिका है। इसमें यह सोच निहित है कि जातीयता, धर्म, नस्ल या लैंगिकता आदि से जुड़े शोषण व आपसी शत्रुता का भौतिक परिस्थितियों से कोई रिश्ता नहीं होता। यह पूरी तरह से व्यक्तिगत तौर पर महसूस किया जाता है। पहचान एक व्यक्ति द्वारा उसके उत्पीड़न के अनुभव के आधार पर बनती है और पूरी तरह से आत्मपरक और स्वायत्त होती है।  यह किसी भी समाज के वर्ग विभाजन पर आधारित विश्लेषण को अस्वीकार करता है। पहचान की राजनीति के अनुसार समाज में मुख्य विभाजन है -- व्यक्तिगत रूप से उत्पीड़न सहन करने वालों और बाकि सभी उनलोगों के बीच जिन्होंने उत्पीड़न का अनुभव नहीं किया है। उदाहरण के लिए पहचान की राजनीति के सिद्धांतों के अनुसार जातिगत उत्पीड़न का अनुभव करने वाला एक दलित मजदूर...