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मनुआ - 9

आज जब मनुआ मिला तो लगा कि वह बड़ी ही बेसब्री से मेरा इंतजार कर रहा था । " बाबूजी ! ऊ टीवी शो आपने देखा कि नाहीं ? "
" कौन शो ..किसका शो ? "
" ऊ का नाम है ...एन डी टीवी अंग्रेजी वोला ...परणव राय आ कोई अर्थशास्त्री रुचिर शर्मा ...। "
उसकी बात सुनकर मुझे हँसी आ गई । मैने हँसते हुये कहा - " वे तो अँग्रेजी मे बात कर रहे होंगे , तो तुमने क्या समझा ? "
" हँसिए मत बाबूजी ! हमहूं मैट्रिक पास हैं आउर कउनो विदाउट इंग्लिश न , विथ इंग्लिश । अरे , लिख - बोल भलही न सकते हैं बाकि कुछ कुछ समझ त जइबे करते हैं । "
" माफ करना भाई ! मै यूँ हीं मजाक कर रहा था । हाँ, तो क्या सुना तुमने ? "
" वो ही , ऊ का तो ट्रेंड होता है ...परणव राय वोही दस ठो ट्रेंडवा पूछ रहे थे आउर रुचिर शर्मा बता रहे थे । ऊ कह रहिन थे कि अमेरिका अपने इहाँ कारपोरेट टैक्सवा घटावे के चक्कर मे है ...आउर अब दुनिया डिग्लोबलाइजेशन के तरफ बढ़ रहिस है ...एकर मतलब का है बाबूजी ? "
" इसका सीधा मतलब समझो कि भूमंडलीकरण भी असफल रहा , अब फिर से सारे देश सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्था की चिन्ता करेंगे । देशों के आपसी व्यापार मे कमी आ रही है ...वित्तीय प्रवाह , खास कर बैंकों का , मे कमी आई है ...आउट सोर्सिंग मे भी कमी आएगी यानी अब विदेशों मे जाकर काम करने मे कमी ...समझो कि अब तक जिन आर्थिक नीतियों पर दुनिया चल रही थी , वह असफल साबित हुई है । "
" आउर ऊ का तो जी डी पी ग्रोथ होता है , ऊ सभे देश के गिर गया है ...।"
" हाँ , 2016 मे मात्र 6 देशों का 7% रहने की संभावना है , जो कि 2008 - 15 के बीच 25देशों का और 2003 - 05 के बीच 50 देशों का 7% या इससे अधिक था । "
" एकर मतलब एहसे भी.खराब दिन आने वाला है बाबूजी ! ....आउर हम हैं कि अच्छे दिन के इंतजार मे अपन दीदा फोड़ रहे हैं । ऊ लोग भी बोल रहिन थे कि सभे देश मे लोगन का विश्वास प्रजातंत्र मे कम हो रहा है आउर ऊ का कहते हैं ...निरंकुशतावाद मे बढ़ रहा है आउर ऊहो मे युवा पीढ़ी मे ज्यादा । ई त बिलकुल हीं ठीक नाहीं है बाबूजी ! "
" देखो भाई , लोकतंत्र मे हो सकता है कि विकास की रफ्तार धीमी हो और कोई निरंकुश शासक के निर्णय से रफ्तार तेज हो , किन्तु उसका एक गलत कदम विनाश के गर्त मे भी पहुंचा सकता है । "
" अरे बाबूजी , ऊ त हमलोग भुगतिए रहे हैं - नोटबंदिया का है । "
" आर्थिक क्षेत्र मे आई मंदी से जब सरकारें नहीं उबर पा रही हैं तो तरह - तरह से जनता को भ्रमित कर रही हैं । राष्ट्रवादी नारे इसी का प्रतिफल हैं । "
" ऊ लोग भी बोलिन कि सभे देशवा मे आजकल राष्ट्रवाद पर जोर है आउर ओकरे नतीजा है कि रक्षा खरचा सबने बढ़ा दीहिन है । "
" लेकिन इससे तो दुनिया की आर्थिक मंदी दूर नहीं होगी भाई ! कोई न कोई विकल्प तो ढूंढना ही होगा । "
" बाबूजी ! अब तक त जे विकल्प है , ऊ त समाजवादिए विकल्प है ......।"
मैने  मुस्कुराते हुए कहा - " लगता है आज के कन्वेंशन मे मजदूर नेताओं का भाषण तुमने गौर से सुना है और देख रहा हूँ कि आजकल तुम काफी समझदार हो गये हो । "
" बाबूजी ! आप हमरा मे जे भी थोड़ा गुण देख रहे हैं न , ऊ सीटूए के कारण है बाकि जे अवगुणवा है ऊ जौना परिवार आ परिवेश मे हमरा पालन-पोषण हुआ रहा ओकर देन है । "

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