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मनुआ - 19

मैं मनुआ के साथ बैठा कल हुए विरोध प्रदर्शन की चर्चा कर ही रहा था कि पांडे हँसते हुए आया - " का हो भाई , हाथी तो उड़ान भर दीहिस ....देशी - विदेशी सैंकड़ों कंपनियाँ लाखों करोड़ रुपिया लगाने को राजी हैं ...अबकी लग रहा है कि सरकार कुछ काम कर रही है । "
" बहुते खुश हो रहे हो पांडे भइया ! ....अरे ईहाँ विकास विरोधी केहू न है ....बाकि लाखों के घर उजाड़ के एगो के घर भर देना , ई कइसन विकास है भइया ....अभियो झारखण्ड मे लाखों अइसन विस्थापित लोग हैं , जिनको रोजी - रोजगार नहीं मिली । ईहे जिला मे देख न ....तेनुघाट परियोजना हो या बोकारो स्टील प्लांट वा कोयला खदान के ऐरिया किसान के जमीन त छिना गया , बाकि कतने लोगन को रोजगार न मिला ... ईहाँ निवेश करे के पहिले ऊ लोग सोच लें कि अब आदिवासियों आउर किसानों से जमीन छीनना आसान नहीं है...एकरा खातिर जे नीतिया बनल है न , ओकरा पूरा पालन करना होगा । "
" त होगा न पालन .... ऊ का कहते हैं ...गाँव के पंचायत से किलियर कराइये के काम शुरु होगा । "
" हँ....हँ....ई लोग केतना कानून के पालन करते हैं आउर  कइसे जमीन छीनते हैं , ऊ त हमलोग बगले के राज ..छत्तीसगढ़ मे देखिए रहे हैं ! लेकिन ई लोगों को नहीं भूलना चाहीं कि ई छत्तीसगढ़ न है ...ई वीर बिरसा आउर तिलका माँझी की धरती है ...सिद्धो - कान्हो आउर शेख भिखारी की धरती है ...लूटेरों के आने की आहट ने ही ईहाँ लोगों को जगा दिया है और लोग एकबार फिर उलगुलान की तइयारी मे लग गए हैं आउर ई त आपहूं जानते हैं भइया कि दूध के जरल मठ्ठो फूंक फूंक के पीता है । "
" हँ त अइसन होगा त सब कंपनियां भाग जाएगी आउर ई परदेश वइसहीं पिछड़ल रह जाएगा ....अरे उनको का है ...ईहाँ विरोध होगा त कउनो दूसरे परदेश मे जा के निवेश कर देंगे । "
" कहँई जाएं..लेकिन ईहाँ त भइया नियम - कानून से चलना होगा ...जमीन लेवे खातिर जे कानून बनल है , पहिले ओकर पालन करें ...फिर लोगों के सहमति से कोई बढ़िया विस्थापन नीति बनावें...आउर जल-जंगल-जमीन के भी उजड़े आ परदूसित होवे से बचावें ...ई न होगा कि मलाई खाके ऊ लोग त चंपत हो जाएं , हमनी पीढ़ी दर पीढ़ी धूर आ छाई फांकते रहें ! "
" अरे भाई , ओकरे खातिर त कनुनवा मे बदलाव किया जा रहा है .... ऊहाँ दिल्ली मे त हो न पाया ..त ईहाँ करे पड़ रहा है ....सुना है कि राजस्थान आउर छत्तीसगढ़ मे त हो भी गया है ...ईहाँ भी , ऊ का कहते हैं , सी एन टी ...एस पी टी नाम के अड़ंगा था , ई सरकार ओकरा दुरूस्त कर दीहिस है ..।"
" हा...हा....हा अड़ंगा नहीं था भइया ...ऊ आदिवासियों ने अप्पन जल-जंगल-जमीन के सुरक्षा खातिर अंग्रेजों से लड़के कानून बनवाया था , जेकरा मे ई सरकार संसोधन करके ओह के कमजोर कर दिया है .... लेकिन जनता को ई तनिको मंजूर नहीं है ...ओकर विरोध जम के हो रहा है ....ओकरे विरोध मे गोला , बड़का गाँव आउर खूंटी मे किसानों ने सहादत दिया है । "
" अब जो हो भइया ... हम त ईहे जानते हैं कि होइहें वही , जे राम रचि राखा ....। " --- कहते हुए पांडे उठा और चल दिया । मैने मनुआ की ओर देखा तो वह हँस दिया - " देखे न बाबूजी , ई लोग बहस कतना भागते हैं । "
" हाँ और यह भी देखा कि जन आंदोलन आदमी को कितना कुछ सिखलाता है । "
हम दोनों एक साथ मुस्कुरा दिये और आने वाले आंदोलनों पर चर्चा करने लगे ।

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