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मनुआ - 20

आज फिर मनुआ पांडे के साथ बहस मे उलझा हुआ था , जब मैं पहुँचा ।मनुआ कुछ तैश मे था - " अइसा बोलके  साहेब दुनिया को का मैसेज दे रहिन है ? ईहे न कि हमरे देश मे खूबे भ्रष्टाचार है , झूठे लोग भरे हुए हैं ...ईहाँ तक कि उनके खिलाफ चुनाव लड़े वाला लोग देश के दुश्मन हैं । "
" ई कब बोलिन है ....तू  लोग खाली झूठे बोलते हो का ? "
" ई झूठ न है भइया ....कल्हे मणिपुर मे बोलिन है कि ऊहाँ सबलोगे भ्रष्ट है .... वइसे देख त भ्रष्टाचार कहंवा न है ...मध्यप्रदेश मे व्यापम जइसन घोटाला पर त आज तक एगो शबद न बोलिन है ...आउर कहिन है कि जे लोग सीमा पार के षडयंत्रकारियों का समर्थन कर रहे हैं , उनको मत चुनना ...एकर का मतलब है ? "
" हँ ..त ई मे ऊ का गलत बोलिन है .... हाले मे ऊहाँ ..दिल्ली के कउनो कौलेज मे फिर अतंकवदियन सब मीटिंग - विटिंग कर रहिन थे ...लेकिन अब पहिले वाली बात नहीं न है ...ऊ का कहते हैं , जे एन यू मे जे हुआ था , ओह के दुहराने नहीं दिया जाएगा । "
" अरे भइया , जे एन यू मे सब ईहे लोग का षडयंत्र था ...नहीं , त आजतक कोई पकड़ाया काहे नहीं ? ....जिसको पकड़े थे ...ऊहो सब छूटिए गए ...कउनो सबूत नहीं दे सके । "
" लेकिन ई लोग से खतरा त है न ....फिर इनको छूट काहे दिया जाए । "
" कउन चीज का छूट ! देश के समस्या पर बिदवान लोग बिचार - विमरश करते हैं त ई मे का गलत है ...अरे उनकर बात त सुन भाई ...गलत लगे तू भी अप्पन बात कह ... बाकि ई का कि लइकन लहका के उपदरव मचवा दो ...कौलेज मे तोड़ फोड़ कर के आयोजन रोकवा दो ...ई त सीधे सीधे तानाशाही है भइया । ...आ उधर लंदन मे जब कोई जेटली जी से पूछिस कि दिल्ली के कालेज का मामला का है ... त बोलिन कि यदि आपको विश्वास है कि आपको अपने भाषण मे देश की सम्प्रभुता पर हमला करने की आजादी है ,तो उसके जवाब के लिए भी तैयार रहना होगा । "
" हँ...,  त ठीके त बोलिन ....जइसन करनी वइसन भरनी । "
" अरे भइया , जब भषणवे न हुआ त का मालूम कि लोग का बोलने वाले थे ....आउर जब भाषण का जवाब भाषण है त लात - मुक्का आ ईंटा - पत्थर काहे चला रहे हो ? ....बात से जवाब दो न । "
" हँ त अब ई समझो कि अब कउनो कमजोर सरकार न है कि लोग मनमानी कर के निकल जायेंगे । "
" त सरकार एक्शन लेवे न ...ई गुंडागर्दी काहे करवा रही है ? ....आउर .इनका से जुड़ल लोग जे पाकिस्तान के आई एस आई खातिर जसूसी करते पकड़ाइन है ....उनका ऊपर का कारवाई कर रहिन है ?....एकर जाँच ठीक से करायें न , त इनकर पार्टी आउर परिवार के बड़का - बड़का लोग भीतरे चल जायेंगे । "
" ई कुल झूठ है ... लोग पकड़ाइन है बाकि उनका ई लोग से कउनो संबंध न है ...अरे अइसा होता त पकड़ते ही काहे ।"
" अरे भइया , ई त नहिए पकड़ाते ....यदि ई लोग को पता चल जाता त सब खेल हो जाता...लेकिन ऊ त सुरक्षा से जुड़ल खुफिया एजेंसी रहा ....गड़बड़ी देखिस और तड़ से पकड़ लीहिस । "
" ई बात है त ऊ ससुर लोग गए काम से ! "
" लेकिन एकर जाँच होय के चाहीं न , हो सकता है कि ई सब तलाब के छोटका मछरिया हों आउर बड़की मछरिया बच जाय । "
" ऊ त साहेब करयबे करेंगे ......।"
" जरूरे करायेंगे ! जइसे कि व्यापम का कराइन है ....ललित मोदी कांड का कराइन ....। अरे , जउन लोकपाल के लेके दिल्ली मे ओतना ड्रामा हुआ , ऊहो आजतक नहीं बनाइन ...जबकि ऊ आंदोलन से जुड़ल एगो नेता इनकर मंत्री है आउर एगो इनकर राज्यपाल । ई खाली झूठ - मूठ जुमलाबाजिए करते फिर रहे हैं ...। "
" अब तू ढेरे बोल रहे हो मनुआ ! साहेब के बारे मे हम कुछो गलत - सलत नहीं सुन सकते । " --- पांडे गुस्से मे उठा और चल दिया । मैंने मनुआ की ओर गर्व से देखा ।वह मंद - मंद मुस्कुरा रहा था ।

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