ताकि नाटक जारी रहे
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मैं ईमानदार हूँ
नहीं - नहीं
वे बेईमान हैं
चूंकि वे बेईमान हैं
मैं ईमानदार हूँ
वे देश के विरोधी हैं
नहीं - नहीं
वे मेरा विरोधी हैं
वे मेरा विरोधी हैं
इसलिए देश के विरोधी हैं
क्योंकि मैं देश हूँ
मेरी इच्छाएँ अनंत हैं
नहीं - नहीं
इच्छाएँ अनंत होती हीं हैं
अनंत आकाश है
मैं आकाश हूँ
यह सच है
नहीं - नहीं
यह झूठ नहीं है
सच कुछ नहीं होता
झूठ भी कुछ नहीं होता
दोनों सापेक्ष हैं
आप नहीं मानते !
मैं भी नहीं मानता
मानना जरूरी भी नहीं
नेपथ्य में हलचल है
स्टेज पर मैं हूँ
नेपथ्य आभासी है
स्टेज वास्तविक
नाटक जारी है
दर्शक अचंभित हैं
नहीं - नहीं
दर्शक मूर्छित हैं
उनकी आँखों में सपने हैं
उनके सपनों में मैं हूँ
सपना उन्होंने नहीं देखे
मैने बो दिए हैं
उनकी आँखों में
वे सपनों के पीछे भागते हैं
मैं सपनों के आगे भागता हूँ
वे मेरे पीछे भागते हैं
यही सच है
और यही झूठ भी
झूठ सच और सच झूठ
होता रहेगा
परदा गिरने तक
या मूर्छा टूटने तक
पर जगे हुए लोग
मेरे विरोधी हो सकते हैं
नहीं नहीं
जगे हुए लोग
मेरे विरोधी हैं ही
सो नहीं टूटने दूँगा
उनकी मूर्छा
ताकि नाटक जारी रहे ।
----- कुमार सत्येन्द्र
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