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मनुआ - 30

जब मैं मनुआ के घर पहुँचा तो वह और पांडे बहस में उलझे हुए थे ।बहस आजादी के दौरान लगने वाले नारों को.लेकर था ।

पांडे --" हम पूछते हैं कि " जय हिंद " सबसे पहिले कौन साब बोलिन थे , बताओ ...? "

" आबिद हसन साफरानी ....। "

" और ई ' मादरे - वतन भारत की जय ' .....बोलो ...बोलो ।"

मनुआ कुछ सोचते हुए -- " अजीम उल्लाह खाँ 1857 में ।"

" इंकलाब जिंदाबाद ....."

" हसरत मोहानी .... । "

"  अच्छा , तो " भारत छोड़ो " जरूर वीर सावरकर साहब दीहिन होंगे.... । "

" जी नहीं , युसूफ मेहर अली साब दीहिन थे  , जे 1942 के आंदोलन का मुख नारा बन गया था ।"

पांडे को झटका पर झटका लग रहा था । उसने कहा - " स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है " - ई किसने कहा था ? "

" लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक साहब ने । "

" तुम मुझे खून दो , हम तुम्हें आजादी देंगे " ...ई बताओ ।"
" नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ....। "

" अरे , तो हमरे नेता सावरकर ने का कहा था ...का नारा दिया था - कौन सिद्धांत दिया था ? " -- पांडे ने झुंझलाते हुए पूछा ।

मनुआ  हँसते हुए  ---" का पांडे भइया , ईहो नहीं मालूम है । "

" न रे ...सचमुच ....। "

" ऊ दीहिन थे -- दू ठो राष्ट्र वाला सिद्धांत यानी पहली बार ऊहे बोलिन थे कि भारत में दू राष्ट्र है -- एक हिंदू राष्ट्र और एक मुस्लिम राष्ट्र ...बस का हुआ कि जिन्ना ओह के लपक लीहिस और .....जे आगे हुआ , सो तो मालूमे है । "

" अच्छा ठीक है ....अब तू सर जी से बतियाओ , हम चलते हैं ...। " -- कहते हुए पांडे उठा और चला गया ।

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