जब मैं मनुआ के घर पहुँचा तो वह और पांडे बहस में उलझे हुए थे ।बहस आजादी के दौरान लगने वाले नारों को.लेकर था ।
पांडे --" हम पूछते हैं कि " जय हिंद " सबसे पहिले कौन साब बोलिन थे , बताओ ...? "
" आबिद हसन साफरानी ....। "
" और ई ' मादरे - वतन भारत की जय ' .....बोलो ...बोलो ।"
मनुआ कुछ सोचते हुए -- " अजीम उल्लाह खाँ 1857 में ।"
" इंकलाब जिंदाबाद ....."
" हसरत मोहानी .... । "
" अच्छा , तो " भारत छोड़ो " जरूर वीर सावरकर साहब दीहिन होंगे.... । "
" जी नहीं , युसूफ मेहर अली साब दीहिन थे , जे 1942 के आंदोलन का मुख नारा बन गया था ।"
पांडे को झटका पर झटका लग रहा था । उसने कहा - " स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है " - ई किसने कहा था ? "
" लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक साहब ने । "
" तुम मुझे खून दो , हम तुम्हें आजादी देंगे " ...ई बताओ ।"
" नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ....। "
" अरे , तो हमरे नेता सावरकर ने का कहा था ...का नारा दिया था - कौन सिद्धांत दिया था ? " -- पांडे ने झुंझलाते हुए पूछा ।
मनुआ हँसते हुए ---" का पांडे भइया , ईहो नहीं मालूम है । "
" न रे ...सचमुच ....। "
" ऊ दीहिन थे -- दू ठो राष्ट्र वाला सिद्धांत यानी पहली बार ऊहे बोलिन थे कि भारत में दू राष्ट्र है -- एक हिंदू राष्ट्र और एक मुस्लिम राष्ट्र ...बस का हुआ कि जिन्ना ओह के लपक लीहिस और .....जे आगे हुआ , सो तो मालूमे है । "
" अच्छा ठीक है ....अब तू सर जी से बतियाओ , हम चलते हैं ...। " -- कहते हुए पांडे उठा और चला गया ।
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