जब मैं मनुआ के घर पहुँचा तो वह पांडे से किसी घटना का जिक्र कर रहा था ।
" कल्हे की बात है भइया ! हमरे साहेब कहीन कि खादी भंडरवा तुम्हरे घर के तरफ है , सो उहाँ से एगो झंडा खरीद के लेते आना । उहे खातिर हम कल उहाँ पहुँचे ..तो देखे कि दू ठो आदमी झंडा खरीद रहा है ।एक आदमी खाकी वर्दी में था सो हमको लगा कि थाना का सिपाही है । जब बैजवा दिखाई पड़ा तो ऊ पर एस बी आई लिखल था ।ऊ लोग सिलिक का झंडा देख रहे थे । सेल्समैनवा अकेले था सो हम चुपचाप खड़े रहे । ऊ लोग पसंद कर लिये । ओकर दाम था - 1440 /- रू.। जब रशीदवा कटाने लगा त वर्दीधरिया धीरे से बोलिस कि रशीदवा 1600/- का काटो । हम त भकुआ के ओकर मुँह देखे लगे । सेल्समैनवा बोलिस कि ई नहीं हो सकता है सर और जदि हम सोलह सौ का रशीद काटेंगे तो हम उतना हीं पैसा लेंगे ...काहे कि ई सरकारी दूकान है ...रशीद वोला रकम हमको जमा करना पड़ेगा । जानते हो भइया ...ऊ दूनो बेशरम कहने लगे कि तो कच्चा रशीद दे दो ..आ नहीं तो कार्बन हटाके ऊपर नीचे रकम बदल दो । बाकि ऊ नहीं तइयार हुआ ...तो उदास होके ऊ लोग पूरा पइसा दीहीन । जब ऊ लोग चल गया त सेल्समैनवा हमसे बोलिस --" देखे न भइया ...ईहाँ राष्ट्रीय झंडा के खरीद - बिकरी में भी लोग दलाली खाते हैं ....ई देश के भगवाने मालिक हैं ....। " हमरा मुँह से बस अतने निकला भइया कि जउन देस के संतरी से मंतरी तक लूटिए रहा है , ऊ कहियो बिकास ना करी । "
" निरास मत हो मनुआ ....अब अप्पन मोदी जी हैं ...कुछ दिन ठहर न , ई सबलोग जेहल जाएगा । "
मनुआ जोर से हँसा -- " का पांडे भइया , मजाक करेला हमहीं मिले थे का , अँय .....? "
पांडे समझ गया कि अब मनुआ सरकार पर करारा प्रहार करेगा , सो चुपचाप उठकर चल दिया । मनुआ मेरी ओर देखकर मुस्कुरा दिया ।
मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र! सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं। इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...
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