मनुआ के घर पहुँचा तो देखा कि वह अपने पड़ोसी ,रामू चाचा से बातचीत में मशगूल है . मै चुपचाप उनकी बात सुनता रहा .
" ई का कर रहे हो रामू चाचा , पहले तो गोबर के एक ही ठो ढेर लगाते थे ..अब दू ठो ....? "
" तू नहीं बूझोगे , काहे कि तुम्हे तो इन चीजों पर विश्वासे नहीं न है . "
" कौन चीज पर ...? "
" ईहे पवितर गौ - मूत और गोबर पर . "
" मतलब ...?"
" मतलब कि गोबर - गोबर में भी फर्क है ...."
" अच्छा - अच्छा , तो एही से गाय और भैंस के गोबर अलग -अलग ....बाकि ई काहे ? "
" न सुना है का ...कि गाय के गोबर सरकार खरीदने वाली है ...ऊ भी 5 रु. किलो ..."
" अच्छा ! ....और भैंस का गोबर ..? "
" ओकर कोई जिक्रे न है "
" अरे चाचा , तो दोनो को मिला न दो , एके साथे बिक जाएगा ..."
" अच्छा फंसाना चाहता है ... दूनो को मिला दिए और यदि पकड़ा गए तब ? "
" कैसे पकड़ाइएगा ....दूनो तो एके जैसन लगता है ."
" तुम्ही चलाक है और सरकार बुड़बक है ...जांचे वाला कोई मशीन जरूरे रखा होगा ...न न हम मिलावट नहीं करेंगे ...ई कुल काम बेपारी सब का है ...हमनी सब किसान हैं ...ई पाप नहीं करेंगे ."
" ई का हुआ चाचा , लोग तो कहते हैं कि तू भी दूध में पानी मिलाते हो '
" कौन ससुरा कहता है ....? "
" अच्छा छोडो न चाचा ..केकर केकर मुंह रोकोगे ...और ऊ ड्रम में का है ? "
" सब पूछिए लोगे ...ऊ में गौ -मूत्र है ."
" गौ -मूत्र ! ...ऊ का होगा ? '
" सुना है कि दवाई बनेगा ...उसको तो सरकार 10 रु. लीटर खरीदेगी "
" बाप रे ! तब तो चाचा , तुम मालेमाल हो जाओगे ! ..अभी तक एको खेप बेंचे हो कि नहीं ? "
" अरे अभी कहाँ ...जब से अखबरवा में पढ़े हैं , लगे जमा करने ..."
" आंय चाचा , तब तो एकरा ख़रीदे खातिर सरकार दुकानों खोलेगी ? "
" अब का जाने , ई कुल नया नया काम सरकार कर रही है ...देखें का होता है ! "
" ई तुमने ठीककहा चाचा ...ई सरकार न , बहुते नया नया काम कर रही है ..गए साल नोटबंदी किहिस और ई साल जीएसटी लगाईस ..अब नया साल में मूत - गोबर खरीदेगी ..किसान को फसल का उचित दाम तो दे नहीं रही है , नया नया शिगूफा छोड़ रही है ."
' अब जो हो बबुआ...." -- कहकर रामू अपना काम में लग गया और हम मनुआ के घर की ओर मुस्कुराते हुए बढ़ गए .
मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र! सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं। इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...
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