कल प.बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर हम चर्चा हीं कर रहे थे कि पांडे ताली बजाते और जयकारा लगाते आ पहुंचा । मनुआ ने कटाक्ष किया --" का हो पांडे भइया , कौनो लॉटरी लग गया का हो , कि हमलोगों को समान काम के समान वेतनवा वोला फैसलवा ........? "
" दूर बुड़बक , तू कुइंया के बेंगे रह गया है का ! अरे , आज करनाटक के रिजल्ट न आ रहा है .....मोदीजी ऊहँवो झंडा गाड़ दीहिन ....मजा आ गया । "
" चलिए , अब मिठाई - विठाई खिलाइए पांडे भइया ! काहे कि अब काँग्रेस मुक्त भारत होये में डेढ़ ठो राज्य बाकी रह गया है और जीते के ट्रेंड यही बना रहा, तो ....।"
" अभी न , मिठइया तो खिलयबे करेंगे , बाकि दू हजार उनईस जीतला के बाद .....। "
" अच्छा भइया , ई जीते वोला खबर आप कब देखे थे ? "
" भकचोन्हर , कब देखे मतलब ! अरे सुबहे से आगिए चल रही है .....न देखा का ...भाजपा आफिस में पटाखा छूट रहा है .....मिठाई बँट रहा है .... शाम में शाहजी प्रेस को बुलाईन है ....।"
" अभी साँझ के खबर न पता है का ?.....सब गुड़ गोबर हो गया ....। " मनुआ ने हँसकर कहा ।
" का बात करता है ....का बहुमत नहीं मिला ...? "-- पांडे का चेहरा उतर सा गया ।
" नाही मिला .....7 - 8 ठो कम रह गया है । बाकि चिंता मत कीजिए पांडे भइया , सरकार आपही की ....।"
" अरे , ऊ तो बनना ही है । ई जोड़ी हार माने वाला न है । कल तक साफ हो जायेगा । " -- कहकर पांडे चलने को हुए कि मनुआ फिर छेंड़ दिया -- " आ हम्मर मिठइया का क्या हुआ ? "
" दूर बुड़बक , हियाँ पेंच फँस गया और तुमको मिठाइये का पड़ा है । " ...कहते हुए पांडे चला गया । मनुआ मेरी ओर देखकर मुस्कुरा दिया और हम कल शाम में प.बंगाल के मुख्यमंत्री का पुतला - दहन कार्यक्रम की तैयारी की चर्चा करने लगे ।
हो वर्ष नव हो हर्ष नव हो सृजन नवल हो गीत नया नव ताल - सुर संगीत नया नूतन जीवन हो रंग नया नव नव विहंग नव नव कलरव नव पुष्प खिलें नव नव पल्लव हो वर्ष नव हो हर्ष नव हालात नए ललकार नई कर ले स्वीकार मत मान हार उम्मीद नई संकल्प नया प्रज्ज्वलित कर एक दीप नया हो तम विनाश हो तम विनाश हो वर्ष नव हो हर्ष नव --- कुमार सत्येन्द्र
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