धन्य हो तुम !
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तुम्हें देखा
बार - बार
की पढ़ने की कोशिश
कई - कई बार
तुम्हारी चमकती आँखों से
बरसते आँसुओं की भाषा
जब तुम खड़ी थी
विश्व विजेता बन
नम्बर वन डाईस पर
और
बज रहा था धुन
हमारे राष्ट्रीय गान का
वो उलाहनें
वो जिल्लतें
वो रूकावटें
जो झेली होगी तुमने
इस मुकाम तक
पहुँचने की राह में
शायद गुजर रही होगी तुम
उनके बीच से ,
असीम धैर्य
बेमिसाल जुनून
बने तुम्हारे ऊर्जा स्रोत
सफलता ने खुद आगे बढ़
चूम लिये
तुम्हारे पाँव
तभी था
दर्प से चमकता
तुम्हारा चेहरा
जीत के साथ
था आत्मविश्वास का भाव
बेटी के जन्म पर
छाती कूटते समाज के
चेहरे पर
आज पड़ी तुम
एक तमाचा सा
करोड़ों ह्रदय उल्लसित हो
बजा रहे थे तालियाँ
साबित किया तूने
फिर एक बार
बेटियाँ होती हैं वरदान
कोई अभिशाप नहीं
धन्य हो तुम
बेटी हिमा दास !
--- कुमार सत्येन्द्र
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