मेरे पिता
मेरे दादा - परदादा
मेरे लक्कड़ दादा
और उनके भी दादा
सभी भारतीय थे
मुझे नहीं पता ,
कितनी बार बदली उन्होंने
अपनी जात या धर्म
किन किन परिस्थितियों में
मुझे नहीं मालूम ,
किम्बदंतियो मेंढूंढता हूँ मैं
उनका इतिहास
सच क्या है
नहीं पता,
अतीत के सूत्र टूटे पड़े हैं
वर्त्तमान सामने खड़ा है - लहूलुहान
बचाना होगा इसे
क्योंकि ,
आज का सच यही है ,
और भविष्य फैला है दूर तक
चीखता हुआ
कि बचा लो मुझे
कल को बचा लो
उसे सुंदर बना लो !
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