Skip to main content

तुम अमर हो गये

तुम अमर हो गये
*************
हम करते रहे रखवाली
खेतों की हरियाली की
तुम करते रहे चौकसी
देश की सरहद की

हमारी हथेलियों के छाले
तेरे पाँव के फफोले
बनते रहे - फूटते रहे
हम खेतों - खदानों में
सोना उपजाते रहे
तुम दुर्गम बीहड़ों में
आशियाना बनाते रहे

पूछती हैं हमसे
खेतों में लहरातीं
गेहूँ की बालियां
घर - आँगन में
फुदकती गोरैया
चितकबरी गाय की
हुमकती बछिया
गाँव की पगडंडियां
कि तुम कब आओगे ?
........................
निःशब्द हो जाते हैं हम
कैसे कह दें..कैसे....
कि तुम अब कभी नहीं आओगे
कभी नहीं.....!

यह तुम्हारा त्याग और बलिदान
नहीं है किसी तख्त औ' ताज के लिए
यह है तो सिर्फ और सिर्फ
अपने देश की लाज के लिए
उसकी आन-बान-शान के लिए
कैसे लुटने देते तुम
अपने पुरखों की दी हुई थाती
कैसे लुटने देते तुम
उनकी शहादत से मिली
यह अनमोल आजादी

और यह जो रुदन है पसरा
चौक - चौराहों पर
कल तुम्हें विस्मृत कर
करेंगे जुगाली
वातानुकूलित कमरे में
रचेंगे प्रपंच
अपनी कुर्सी की खातिर
उनकी चिंता की परिधि से
तुम कल भी बाहर थे
और कल भी बाहर रहोगे

किंतु , तेरे रक्त से सनी
देश की माटी
याद रखेगी तुम्हें
तुम अमर हो गये
मेरे लाल !
तुम ...अमर ....हो ...गये !

Comments

Popular posts from this blog

हो वर्ष नव

हो वर्ष नव हो हर्ष नव हो ‌‌सृजन नवल हो गीत नया  नव ताल - सुर संगीत नया  नूतन जीवन  हो रंग नया  नव नव विहंग नव नव कलरव नव पुष्प खिलें नव नव पल्लव  हो वर्ष नव हो हर्ष नव हालात नए ललकार नई कर ले स्वीकार  मत मान हार  उम्मीद नई  संकल्प नया  प्रज्ज्वलित कर एक दीप नया  हो तम  विनाश हो तम विनाश हो वर्ष नव हो हर्ष नव --- कुमार सत्येन्द्र

मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र

मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र!  सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों   की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं।  इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...

पहचान की राजनीति

## पहचान की राजनीति बनाम वर्गाधारित राजनीति। ## पहचान की राजनीति का मतलब क्या है ? उत्तर आधुनिकता की ही तरह पूंजीवादी सिद्धांतों से निकली पहचान की राजनीति मार्क्सवाद का विकल्प होने का दावा करती है। यह मानती है कि राजनीति और भौतिक परिस्थितियों के बीच कोई रिश्ता नहीं होता। यह एक ऐसे समाज की परिकल्पना करती है जो तमाम तरह के शोषण और आपसी शत्रुता पर टिका है। इसमें यह सोच निहित है कि जातीयता, धर्म, नस्ल या लैंगिकता आदि से जुड़े शोषण व आपसी शत्रुता का भौतिक परिस्थितियों से कोई रिश्ता नहीं होता। यह पूरी तरह से व्यक्तिगत तौर पर महसूस किया जाता है। पहचान एक व्यक्ति द्वारा उसके उत्पीड़न के अनुभव के आधार पर बनती है और पूरी तरह से आत्मपरक और स्वायत्त होती है।  यह किसी भी समाज के वर्ग विभाजन पर आधारित विश्लेषण को अस्वीकार करता है। पहचान की राजनीति के अनुसार समाज में मुख्य विभाजन है -- व्यक्तिगत रूप से उत्पीड़न सहन करने वालों और बाकि सभी उनलोगों के बीच जिन्होंने उत्पीड़न का अनुभव नहीं किया है। उदाहरण के लिए पहचान की राजनीति के सिद्धांतों के अनुसार जातिगत उत्पीड़न का अनुभव करने वाला एक दलित मजदूर...