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मजदूर दिवस

यह दृश्य लौह नगरी बोकारो स्टील सिटी की है । अवसर है मई दिवस त्योहार का। एक मजदूर नगरी में इस महान त्योहार के अवसर पर इतनी क्षीण उपस्थिति !  आज का दिन अपने हक - हुकूक की रक्षा करने हेतु संकल्प लेने का है। पर स्थिति को देखकर लगता है कि हम मजदूरों को आज आत्मपरीक्षण और आत्ममंथन करने की भी जरूरत है । कहाँ चूके , कैसे चूके और क्यों चूके ? हमसे कब - कब कौन सी गलतियां हुईं या अब भी हो रही हैं ? ऐसा क्यों हुआ कि साठ के दशक में जन्मा शहर नब्बे के दशक से मृत्यु- शैय्या पर है ? जिस एक प्लांट की बदौलत जुड़वां शहर चास - बोकारो कुलांचे भरते थे ,वे आज उदास और घिसटते हुए क्यों चल रहे हैं ? किशोर वा युवा शहर बूढ़े-बुजुर्गों का शहर क्यों बन गया है । जो राजनीतिक दल पब्लिक सेक्टर के सिर्फ विरोधी ही नहीं शत्रु भी हैं , उनके नुमाइंदे हमारे जनप्रतिनिधि क्यों कर चुने गए ? मजदूरों , छोटे व्यापारियों, फुटपाथ के दूकानदारों को यह ख्याल क्यों न रहा कि इस प्लांट की गिरती अवस्था से उनके जीवन पर भी प्रभाव पड़ेगा ? उन्हें जाग्रत करने की जिम्मेदारी किसकी थी ?
इस आधुनिक तीर्थ का मुख्य मंदिर ध्वस्त होता रहा , कॉलोनियां बेरंग और सुनसान होती रहीं , विद्यालयों के भव्य इमारत खंडहर बनते रहे और हम सेवानिवृत्त होकर नये-नये बने मंदिरों में आरती के गीत गाते रहे , मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाकर अजान पढ़ते रहे , गिरिजों और गुरुद्वारों में प्रार्थना और अरदास करते रहे । हमारे बच्चे जीविकोपार्जन के लिए यहाँ से पलायन कर गए और हम अपनी जाति और धर्म की श्रेष्ठता को लेकर इतने आत्ममुग्ध हुए कि यह भी पता नहीं चला कि कब हमने अपने हाथों निर्मित  घोसले को जाने - अनजाने नोच डाला , वगैर यह सोचे कि आनेवाली पीढ़ियाँ कहाँ रहेंगी , कैसे अपना जीवन यापन करेंगी । हमने खुद अपने हाथों अपने बच्चों का भविष्य चौपट किया है । हमने उस की रक्षा नहीं की , जो हमारे पूर्वजों ने हमें सौंपा था ।
अब भी वक्त है साथियों , यदि हम जाति -धर्म - क्षेत्र की बेंड़ियों को तोड़कर  एकताबद्ध हो जायें , तो एशिया के इस महान संयंत्र को बचा सकते हैं और आनेवाली सरकारों को उनकी नीतियाँ बदलने को बाध्य कर सकते हैं । आइए , मजदूर दिवस के इस महान अवसर पर हम संकल्प लें कि हम एकता बनाकर जनांदोलनों के बल पर आनेवाली सरकार को बाध्य करेंगे कि वह न केवल बोकारो इस्पात संयंत्र में रोजगार निर्मित करे , बल्कि यहाँ और भी कल -कारखाना व उच्च शिक्षण संस्थान खोले , ताकि हमारे बच्चों को दूसरे राज्यों में पढ़ाई या रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े ।

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