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संस्कार

परंपरागत रूप से हम दक्षिणपंथी संस्कारों के साथ बड़े होते हैं । वैज्ञानिक चेतना से टकराने के बाद हममें से कुछ  लोग इसे अंगीकार करते हैं । शेष या तो उसी संस्कार में और भी लिप्त हो जाते हैं या कुछेक मध्यमार्गी हो जाते हैं ।भाववादी दर्शन और भौतिकवादी दर्शन का यह विवाद सदियों पुराना है और अब तक हमने यही देखा है कि पहले वाला ही जीतता रहा है ।वैज्ञानिक उपलब्धियों का इस्तेमाल भी वे बड़ी ही खूबसूरती से अवैज्ञानिकता फैलाने में कर लेते हैं । इसके लिए उन्हें पूंजी और सत्ता दोनों का समर्थन प्राप्त होता है । इधर जो चंद लोग अंधविश्वास / अंधश्रद्धा उन्मूलन का प्रयास करते हैं , उन्हें चार्वाक की ही तरह समूल नष्ट करने का प्रयास होता है वा समूल नष्ट कर दिया जाता है ।
बड़ा ही कठिन संघर्ष है ।फिर भी जारी है और भविष्य में भी जारी रहेगा । हमें अपनी क्षमता के अनुसार इस संघर्ष में योगदान देना है । हार से सबक लेते हुए आगे की रणनीति बनानी है । हमारे संघर्ष में हताशा और निराशा के लिए कोई जगह नहीं होना चाहिए।
आइए , किसी जादूगर का इंतजार करने की बजाए अपने सीमित संसाधनों और क्षमताओं को इस संघर्ष में लगाएं । इस आह्वान के साथ कि आनेवाला कल हमारा है ।

#हार_यदि_हौसला_दे_तो_जीत_अवश्यंभावी_है

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हो वर्ष नव

हो वर्ष नव हो हर्ष नव हो ‌‌सृजन नवल हो गीत नया  नव ताल - सुर संगीत नया  नूतन जीवन  हो रंग नया  नव नव विहंग नव नव कलरव नव पुष्प खिलें नव नव पल्लव  हो वर्ष नव हो हर्ष नव हालात नए ललकार नई कर ले स्वीकार  मत मान हार  उम्मीद नई  संकल्प नया  प्रज्ज्वलित कर एक दीप नया  हो तम  विनाश हो तम विनाश हो वर्ष नव हो हर्ष नव --- कुमार सत्येन्द्र

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मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र!  सवाल ये उठता है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र ही क्यूँ? जवाब है कि मार्क्सवादी राजनैतिक अर्थशास्त्र हमें पूँजीवादी व्यवस्था का शोषण, विकास और उसके संकट को समझने में मदद करता है। यह समाज के आर्थिक आधार का अध्ययन करता है और इसीलिए उनके लिए ज़रूरी है जो सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हैं। बुर्ज़ुआ अर्थशास्त्र, जो कि हमारे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है, की तरह मार्क्सवादी अर्थशास्त्र ये दिखावा नहीं करता कि वह सभी सामाजिक व्यवस्थाओं की विश्वव्यापी आर्थिक नियमों   की खोज करने की कोशिश करता है। मार्क्सवादी विश्लेषण के अनुसार हर उत्पादन के तरीक़े का अपना विशिष्ट नियम होता है। इसी कारण मार्क्सवादी विश्लेषण के इस विज्ञान को हम राजनैतिक अर्थशास्त्र कहते हैं।  इस विषय पर मार्क्स से लेकर लेनिन ने बहुत कुछ लिखा है परंतु हम आसान तरीक़े से राजनैतिक अर्थशास्त्र के निम्नलिखित चार सवालों तक ही खुद को सीमित रखेंगे - 1. पूंजीवादी अर्थव्यव्स्था वह उत्पादन का तरीक़ा है जहां पूँजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं वो उत्पादन के लिए म...

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