हैसियत
तुम्हारी हैसियत नहीं
कि हमे खरीद सको
और सुन लो,
जिस दिन जनता
पहचान लेगी
अपना पक्ष,
हम ही हम होंगे
तेरे सामने
तुम्हारी तिजोरियों को
मुँह चिढ़ाते
ओ लोकतंत्र को
धनतंत्र में बदलने वालों,
उस दिन फटी एड़ियों वाले
खुरदरी हथेलियों वाले
कर रहे होंगे तेरा हिसाब
बेशक,
हम हारे हैं चुनाव
पर हौसला नहीं हारे हैं
खेतो - खलिहानों से
खानों - खदानों से
सभी कारखानों से
स्कूलों - कॉलेजों से
निकलेंगे हम
एकताबद्ध होकर
सड़क पर
अपने हक और हुकूक के लिए
हम संघर्ष में थे
संघर्ष में हैं, और
संघर्ष में रहेंगे
---- कुमार सत्येन्द्र
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