मैं और मनुआ कोयला मजदूरों को हड़ताल में मिली सफलता की चर्चा कर रहे थे कि मनुआ का लड़का खुशी से चिल्लाते हुए आया ।
लड़का - "पापा ...पापा ! मैं जेएनयू में सेलेक्ट हो गया पापा ...."
उसने झुककर मेरे और मनुआ के पाँव छुए । मनुआ की आँखें भर आईं । उसने बेटे को गले से लगा लिया । शोरगुल सुनकर मनुआ की पत्नी भी आ गई । बेटे ने माँ के भी चरण स्पर्श किये । माँ ने खींचकर गले लगाया और पैसा देते हुए कहा -- " जाओ बेटा , लड्डू ले आओ... सबके मुँह मीठा कराओ ।"
लड़का पैसा लेकर बाजार की ओर दौड़ गया ।
बाबूजी -- " सब्र और मिहनत का फल मीठा होता है मनुआ ! "
मनुआ --- " हाँ , बाबूजी ! ऊ कहते हैं न कि जहाँ चाह , ऊहाँ राह । बबुआ बीए करला के बाद से इसी की तैयारी में लग गया था ...ऊ कहता था कि एक तो ई नामी यूनिवर्सिटी है , दोसरे हियाँ काफी सस्ती और अच्छी पढ़ाई है ..।"
बाबूजी --- " हाँ भाई , तभी तो वहाँ गरीबों के बच्चे भी पढ़ पाते हैं । "
तभी लड़का मिठाई लेकर आ जाता है । मनुआ ने आवाज देकर रघु काका को बुलाया । अभी वह लड्डू बाँट ही रहा था कि पांडे आ धमका ।
पांडे -- " कौना चीज का लड्डू बँटा रहा है भाई ? "
मनुआ --- " आइए पांडे भइया , आप भी मुँह मीठा कीजिए ।"
पांडे -- " लेकिन पहिले ई तो बताओ कि कौना खुशी में.....? "
मनुआ --- " पांडे भइया , बस ई समझ लीजिए कि हम्मर सब सरधा बबुआ पूरा कर दिया ....।"
पांडे ----" अइसा कौन सा तीर मार दिया है भाई , जरा मैं भी तो सुनूँ । "--- पांडे ने लड्डू लेते हुए पूछा ।
मनुआ --- " ऊ का है न भइया ...हम्मर बबुआ जेएनयू का कम्पटीशन निकाल लिहीस है ...।"
पांडे ---(हँसते हुए) -- " दुर बुड़बक , ई हे में एतना अगरा रहा है .... न मालूम है का कि वो देशद्रोही बनावे वाला यूनिवर्सिटी है ।"
मनुआ --- " ई आप का कह रहे हैं भइया ! ऊ तो देश का नाक है नाक । "
पांडे ---" नाक नहीं है......नाक कटवा यूनिवर्सिटी है ...ऊ हाँ टुकड़े-टुकड़े गैंग पैदा होते हैं , जो देश के विरोध में नारे लगाते हैं ।"
बाबूजी ---" लगता है कि पांडे जी ह्वाट्सएप यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी हैं ....गलत - सलत अफवाहों के शिकार हो गए हैं ।"
पांडे --- " सर जी ! ह्वाट्सएप - फ्वाट्सप के बात हम नहीं करते हैं.... हमने टीभिया पर अपने आँख से देखा है और कान से सुना है ।"
बाबूजी --- " वह सब टेंपर्ड विडियो था भाई ...यदि उसमें सच्चाई होती , तो क्या वे बच्चे बाहर घूम रहे होते ? "
पांडे ---" आप भी न हद करते हैं सर जी , ऊ सब जमानत पर हैं ....जिस दिन सरकार चाहेगी , भीतर ठेल देगी ....ई हे देश के टैक्स से पढ़ेंगे और ओकरे टुकड़ा - टुकड़ा भी करेंगे । जौना थरिया में खायेंगे , ओकरे में छेद करेंगे..।"
मनुआ --- " अच्छा ! त आप भी ऊ लोग के चाल में फँस के अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं भइया ।"
पांडे ---" चाल में ? केकर चाल में ? हमको तू बुड़बक समझता है का ? अरे, ऊ हाँ सरकारी पैसा पर ऐश होता है ऐश ....एक एक ठो लड़िका - लड़की दस - दस , पन्द्रह-पन्द्रह साल ऊ हाँ पड़ा रहता है । "
बाबूजी -- " ऐसा नहीं है पांडे जी ! अगर कोई लड़का बीए करके गया है , तो एमए,एमफिल और पीएचडी करने में दस साल तो लग ही जाते हैं , रिसर्च करना कोई मामूली काम नहीं है ,यह तो आदमी पूरी जिंदगी करता रहता है । "
पांडे --- " अरे सर जी ! ऊ का रिसर्च करते हैं , सबको पता चल गया है ....लड़िका - लड़की झुंड के झुंड रात - बिरात घुमते रहते हैं , गुलछर्रे उड़ाते हैं ...सिगरेट और शराब पीना तो आम बात है...। "
अबतक खामोशी से बैठा मनुआ के लड़के के सब्र का बाँध टूट गया । वह फट पड़ा ।
लड़का ---" बस...बस कीजिए चाचाजी , कहीं आप उस नेता की तरह कंडोम की गिनती न बताने लगें । "
पांडे --- " लो , त तुम्हें तो सबकुछ पता है ।"
लड़का ---" हाँ चाचाजी , हमें सबकुछ पता है । हमको यह भी पता है कि उस यूनिवर्सिटी ने देश को कितने अनमोल रत्न दिये हैं । आज भी हमारे केंद्रीय मंत्रालय में दो रत्न सुशोभित हैं । एक रत्न ने अभी हाल ही में नोबल पुरस्कार जीता है । अगर आइएएस और आइपीएस की बात करेंगे , तो अगिनत हो जायेंगे ।"
पांडे ---" चलो तुम्हरा कहा मान लेते हैं । लेकिन उस यूनिवर्सिटी में अइसा का है कि कमरे का रेंट बरसों से 10 ही रुपये है ? अब सरकार थोड़ा सा बढ़ाना चाहती है , तो ई लोग उत्पात मचा रहा है , पढ़ाई - लिखाई ठप्प करके गुंडागर्दी कर रहा है ।"
मनुआ -- " तबे न कहे भइया कि आप अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं । अरे , ई कैसा बढ़ोतरी कि एके बार दस रुपया से तीन सौ ...।"
बाबूजी ---" इतना ही नहीं , मेस का सर्विस चार्ज , बिजली - पानी का चार्ज , सब मिला दो , तो अभी जो छात्र ढाई हजार से तीन हजार महीना में देता है , उसे सात से दस हजार तक देने होंगे यानी कि साठ से सत्तर हजार रुपये सलाना ।"
पांडे ---" सर जी ! ई देश में और भी तो यूनिवर्सिटी है न , ऊ में जो पढ़ते हैं , ऊ भी तो महंगा फीस - फास देते हैं ...फिर ई लोग ....।"
मनुआ --- " ठीके बोले भइया , जेएनयू के लड़िकन सब ई हे तो कहते हैं कि सवाल ई नहीं कि जेएनयू की पढ़ाई सस्ती क्यों है , सवाल ई है कि दूसरे यूनिवर्सिटी में पढ़ाई महँगी क्यों है ?"
पांडे --- " देख मनुआ , ई देश के लोगन को मुफ्तखोरी का रोग लग गया है ...हमलोग सब कुछ मुफ्ते में चाहते हैं ....आ जानते हो न कि मुफ्त में मिलल माल का कौनो कदर नहीं होता ।"
मनुआ -- "सच बोले भइया , हमलोग मुफ्तखोर हैं .....और ई हमरे नेता और मंत्री लोग ...ई लोगन का लाख - डेढ़ लाख तो तनखा है ...का बाबूजी ? "
बाबूजी --- " हाँ भाई ,ऊपर से बंगला फ्री,बिजली - पानी फ्री , ट्रेभलिंग फ्री , टेलिफोन फ्री ...सब सरकारी कर्मचारी के लिए पेंशन योजना खत्म , लेकिन इन लोगों के लिए एक छोड़ दो दो पेंशन...मरने के बाद बीवियों को पेंशन...।"
पांडे -- " ई हो गलत है सर जी , हम कौनो इसका समर्थन करते हैं का ? "
मनुआ -- " नहीं करते हैं , त इसके खिलाफ काहे नहीं बोलते हैं .....कॉरपोरेटवन को साल में एक - डेढ़ लाख करोड़ रुपये तो कर छूट मिलता है , ओकरा काहे न मुफ्तखोरी कहते हैं । "
पांडे ---" दुर बुड़बक , बिच्छी के मंतरे न जानता है और साँपे के बिल में हाथ डालने लगता है । अरे, तुमको मालूम है , ई कंपनियां केतना लोग को रोजगार .......।"
मनुआ --- " रोजगार देता है.... बोलिए ...बोलिए ...! चुपा काहे गए ....?आपके बबुआ अइसने कंपनिया में न था....जइसे कंपनी का मुनाफा घटा , निकाल दीहीस इसको । "
लड़का --- " चाचाजी , इन अमीर लोगों की चाल समझिए । ये लोग नहीं चाहते हैं कि गरीब के बच्चे पढ़ें - लिखें । वो जानते हैं कि ये लोग पढ़- लिख जाएगा , तो हमारी चालों को विफल कर देगा ।"
पांडे ---" सुन बबुआ , अभी त तोरा पांख जमबे किया है , अभिए से एतना मत फड़फड़ाओ । बाकि मनुआ जे राजनीति बतिया रहा है , ऊ भी हम खूबे समझते हैं ।"--- कहते हुए पांडे उठने लगता है ।"
मनुआ -- " हमरी राजनीति समझ रहे होते , तो उनके पक्ष में नहीं खड़ा होते भइया ! ...ऊ लोग हम गरीबन को सब दिन पढ़ाई से दूर रखे , ताकि हम बुड़बक बने रहें और ऊ हमरा शोषण करते रहें ....।"
पांडे ---" वाह ! अब तू अप्पन रंग दिखाने लगा मनुआ....ऊ हे ललका रंग....शोषण- दमन...क्रांति... ! ....लगे रहो भाई , लगे रहो... बाकि ई जान लो तुम्हारी राजनीति फेल हो चुकी है ।" ---कहते हुए पांडे चल दिया ।
मनुआ --- " ई राजनीति न है भइया ....हमरा हक है....एक पढ़ाई , मुफ्त पढ़ाई ....एक चिकित्सा , मुफ्त चिकित्सा ! और ई हमलोग लेके रहेंगे ।"
इतना कहकर मनुआ मेरी ओर मुखातिब हुआ ।
मनुआ --- " बाबूजी ! अभी जो ऊहाँ पढ़े में खर्चा है , ऊ तो हम किसी तरह उठा लेंगे , लेकिन यदि बढ़ा दिया गया तो........।"
बाबूजी --" ऐसा न होगा मनुआ , आंदोलन तबतक चलता रहेगा , जबतक बढ़ा हुआ फीस वापस न हो जाए । "
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