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भ्रम

भ्रम
आरक्षण का झांसा देकर
 छीन ली उसने 
तुम्हारी सारी नौकरियाँ

दिखाकर भय इस्लाम का 
भर दिया
तुम्हारे भीतर
 लबालब 
घृणा और नफरत 

धर्म की चाशनी में
राजनीति को डुबोकर
छद्म राष्ट्रवाद की बनाई
ऐसी मीठी गोलियां 
जिसे खाकर तुमने
खो दिया 
अपना विवेक
और लगा लिया 
अपने चेहरे पर
उसका चेहरा

उसने छीन लिया तुमसे
मुफ्त शिक्षा
मुफ्त स्वास्थ्य
तुम्हारा जल-जंगल-जमीन
तुम्हारी सोच
तुम्हारा जमीर
और रख दिया गिरवी
धन - कुबेरों के पास

ऐसा चढ़ा नशा
कि भूल गए तुम
रोजी रोटी रोजगार
बढ़ते काम के घंटे
घटता हुआ पगार
दलितों का मॉब लिंचिंग ,
बेटियों का बलात्कार
आत्महत्या करता किसान
लहूलुहान होता हिंदुस्तान

----- कुमार सत्येन्द्र

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