**चेतावनी**
जब बीतेगा तुमपर , होगा मुझसा बुरा हाल
साथी , तब सोचोगे
ढोओगे अपने कंधों पर इच्छाओं की लाश
साथी , तब सोचोगे
अभी तुम्हें मिल ही जाती है छोटी सी तनख्वाह
महँगाई में पिसकर भी है नहीं निकलती आह
छँटनी - तालाबंदी से जब होओगे दो-चार
साथी , तब सोचोगे
पीएफ , सहकारी बैंकों से मिल जाती है ऋण
अभी तुम्हारा घर - आंगन है हँसी-खुशी में लीन
छिन जाएगी सारी खुशियाँ , होओगे लाचार
साथी , तब सोचोगे
अभी तुम्हारा सर है ऊँचा झूठी-कल्पित बातों से
अभी नहीं तुम बाखबर हो दुश्मन के आघातों से
एक न एक दिन पड़ेंगे तेरे पेट पर उनके लात
साथी , तब सोचोगे
जब बीतेगा तुम पर , होगा मुझ सा बुरा हाल
साथी , तब सोचोगे
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