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थूक (लघुकथा)

थूक (लघुकथा)
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पत्नी --- ऐ जी , सुनो ...कहाँ जा रहे हो ? 

पति (गुटके को थूकते हुए)-- बाजार जा रहा हूँ , सब्जी लेने ....क्या बात है ?

पत्नी(मुँह को पल्लू से ढकते हुए)-- देखो जी , यहाँ थूका तो थूका , बाहर कहीं मत थूकना ....वरना लोग ' वो ' समझकर पुलिस से पकड़ा देंगे ।

पति --अरे , ये ' वो ' कौन है ? 

पत्नी ---  नहीं मालूम ...वो सब , जो पकड़े जा रहे हैं ....पड़ोसिन कह रही थी कि वो ही लोग थूक - थूक कर कोरोना फैला रहे हैं ।

पति --- अच्छा ! तुम बाहर कभी जाती हो , तो सबसे ज्यादा किसे थूकते देखती हो ?

पत्नी -- अरे ! हम तो यहाँ सबको थूकते देखते हैं । खैनी - गुटका खाएगा , तो थूकेगा नहीं ?

पति --- तो फिर  यह बात आई कहाँ से ? 

पत्नी --- जाने दो न , हो सकता है कि अफवाह ही  हो । फिर भी आप बाहर कहीं मत थूकना ।

पति --- ठीक है भाई , थूकने की बजाए मैं उसे गटक जाऊँगा , बस ...और कुछ ? 

(सावधान ! कोरोना छुआछुत से फैलनेवाली बीमारी है । इधर - उधर मत थूकें । )

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