बहुरुपिया
एक समय एक राजा था
वह वेश बदलकर आता था
जब वह
डमरू बजाते आता
लोग मदारी कहते
शंख बजाते आता
तो पुजारी कहते
बल्ला घुमाते आता
तो खिलाड़ी कहते
पांसे फेंटते आता
तो जुआरी कहते
धनुष बाण लिये आता
तो धनुर्धारी कहते
एक मनुष्य और इतने रूप ?
लोग थे फिर भी रहते चुप
एक दिन हुआ अजीब वाकया
एक बच्चा उसे देखकर पहले हँसा
फिर चिल्लाकर कहा --
देखो - देखो आया बहुरुपिया
----- कुमार सत्येन्द्र
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