कम्युनल वायरस
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कमरे में बैठा आज का अखबार उलट - पलट रहा था कि मेरी बारह वर्षीय पोती ने कमरे में दबे पाँव प्रवेश किया । आहट पाकर मैंने उसकी ओर देखा । इधर उधर देखते हुए उसने बहुत ही धीमे स्वर में कहा -- " दादा जी ! क्या आप अपना मोबाईल दो मिनट के लिए देंगे ? "
" क्यों ....अपनी मम्मा से ले लो ! "
होठों पर ऊँगली रखते हुए उसने लगभग फुसफुसाते हुए कहा ---" स्सी....धीरे बोलिए दादा जी ...! आप नहीं जानते .....मम्मा नहीं देंगी ....। आप दो न ...प्लीज ! "
" क्या करना है ? गेम खेलोगी ? "
" नहीं दादाजी , अपनी सहेली नीतू से बातें करनी है ...कई दिनों से हमारी बातचीत नहीं हुई है । "
उसके स्वर में एक तड़प थी। बेचैनी थी ।
मैने मुस्कुराते हुए मोबाईल उसकी ओर बढ़ा दिया । उसने लपक कर लिया । उसका चेहरा खुशी से खिल उठा । वह उसी तरह दबे पाँव अपने कमरे में चली गई ।
तब उसकी माँ कीचन में व्यस्त थी ।
आज तकरीबन 30 दिनों से पूरे देश में लॉकडाऊन चल रहा है । स्कूल , कॉलेज , कल - कारखाने , सरकारी एवं निजी प्रतिष्ठान , अतिआवश्यक सेवाओं को छोड़कर , सभी बंद हैं । अचानक हुए लॉकडाऊन से जो जहाँ था , वहीं फँसा हुआ है ।कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया को जेलखाने में तब्दील कर दिया है । तीन महीने से दुनिया के हजारों वैज्ञानिक इसकी दवा या वैक्सीन ईजाद करने में लगे हुए हैं । पर , अभी कोई सफलता नहीं मिली है । इस खतरनाक बीमारी ने अबतक लगभग दो लाख लोगों की जानें ले ली है । करोड़ों लोग संक्रमित हैं । अखबार में रोज रोज ऐसी खबरों को पढ़ - पढ़कर ऊब और खीझ होने लगी है ।
मैं अभी इसी उधेड़बुन में था कि पोती ने पुनः कमरे में प्रवेश किया । जाते समय जो खुशी उसके चेहरे पर थी , वापस लौटी तो वह गायब थी।
फोन वापस करते हुए उसने पूछा --- " दादाजी ! क्या कोरोनावायरस पूरी दुनिया में चीन ने जानबूझकर फैलाया है ? "
" जानबूझकर ! ऐसा कोई करता है बेटा ? हाँ , ऐसा बताया जा रहा है कि सबसे पहले यह वायरस चीन में फैला । कैसे फैला , किससे फैला , यह अभी तक कुछ भी नहीं पता । "
" और अपने देश में इसे लेकर कौन लोग आए ? " ---उसने बड़े ही उदास स्वर में पूछा ।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा --- " जो लोग विदेशों से अपने देश में आए ......। "
" नहीं..... नीतू कह रही थी कि मुसलमान लोग ले कर आए हैं और वही लोग यहाँ चारो तरफ फैला भी रहे हैं ...... "
" ऐसा नहीं है बेटा ! कुछ तो सरकार की कमियों के कारण और कुछ धर्मांध लोगों की गलतियों के कारण यह हमारे देश में तेजी से फैला है । "
" वही तो ....। मैंने एकबार आपको मम्मा से बात करते सुना था , सो नीतू से उलझ गई । पर वह मानती ही नहीं है । कहने लगी कि अब हमें स्कूल में सलमा के साथ नहीं रहना है । "
" कौन सलमा ....?"
" अरे , वही सलमा ....मेरी सहेली , जो मेरे बर्थडे की पार्टी में आई थी । आप कितने भुलक्कड़ हो दादाजी ! वो आपसे मिली तो थी । "
" अरे हाँ , वो शीराज़ की भतीजी ...बहुत अच्छी बच्ची है .....शीराज़ भी बहुत अच्छा लड़का है । बैंक में काम करता है न ? "
" हाँ , तो इसी बात पर मेरा नीतू के साथ आज झगड़ा हो गया.....अरे , वो ऐसा कैसे कह सकती है कि
कोरोनावायरस सारे मुसलमान फैला रहे हैं । "
" नहीं , उसे ऐसा नहीं कहना चाहिए था । पर तुम्हें भी उससे झगड़ा नहीं करना चाहिए था । "
" क्यों दादाजी ? आप ही तो कहते हैं कि समाज में नफरत और घृणा नहीं फैलाना चाहिए ....फिर यह क्या है ? "
" ठीक है , पर , गलती नीतू की भी नहीं है । वह तो अभी बच्ची है , नादान है । घर - परिवार में जो सुनती है , वही कहती है । लॉकडाऊन खत्म होने दो , मैं तुम्हारे साथ उसके घर जाऊँगा । "
" क्यों ....उसके घर क्यों ? "
" वायरस की दवा लेकर ....। "मैने मुस्कुराते हुए जवाब दिया ।
" वायरस की दवा ! " , उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे , " पर वह तो अभीतक बनी नहीं है दादाजी ! "
" हाँ बेटा , पर, मैं जिस वायरस की बात कर रहा हूँ , वो कोरोनावायरस नहीं है , उससे भी खतरनाक वायरस है ।"
" अच्छा.....!"
" हाँ , कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इंसान को इंसान से अलग रहना पड़ता है न ? "
" हाँ....।"
" किंतु , इस वायरस से लड़ने के लिए इंसान को इंसान से हिल मिलकर रहना पड़ता है । "
" गजब ....! ठीक उसका उल्टा ! " , उसने हँसते हुए कहा , "फिर भी... इसका कोई तो नाम होगा न दादाजी ? "
" हाँ , है न बेटा , इसका नाम है .....कम्युनल वायरस ।"
पता नहीं , वह क्या और कितना समझी ।
पर , हँसते हुए बोली --- " दादाजी ! जा रही हूँ मम्मा से पूछने कि वह इस वायरस को जानती है क्या ? "
-------कुमार सत्येन्द्र
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