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पीएम मैटिरियल (लघुकथा)

पीएम मैटिरियल(लघुकथा)
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" गोपाल ! "
"हाँ पापा "
"सुबह से टीवी देख रहे हो , चलो पढ़ाई करो ।"
" सुबह से पढ़ ही तो रहा था पापा !"
"अभी अभी सोकर उठे हो और.......कितना झूठ बोलते हो तुम ....?"
"दादा जी से पूछ लीजिए न ।"
"मेरी आँखें फूट गई हैं क्या ? मैं देख रहा हूँ तुम्हारी उद्दंडता ....ऊपर से सफेद झूठ ....।चलो , बंद करो टीवी ....नहीं तो आज पिटाई कर दूँगा ।"
" ऊँँ....ऊँ....दादाजी ....!"
"अरे , क्यों मेरे नन्हें गोपाल पर बिगड़ते हो ? जा बबुआ , अंदर कमरे में चला जा ...।"
लड़का पैर पटकते हुए ..पापा को घूरते हुए कमरे में चला गया ।
 21 दिनों के लॉक डाऊन से सभी लोग परेशान थे । झुंझलाहट सबके चेहरे पर साफ झलक रही थी ।

" पिताजी ! आपके लाड़ - प्यार ने गोपाल को बिगाड़ कर रख दिया है । अब तो बेइंतहा झूठ बोलने लगा है । "
" तुम भले उसके झूठ से नाराज होओ , मैं खुश हूँ .....।"
" क्या............?"
" हाँ .....मुझे अपने गोपाल में पीएम मैटिरियल साफ दिखाई दे रहा है ...। "

तब तक टीवी पर प्रधानमंत्री का देश के नाम संदेश शुरू हो गया । दोनों टीवी की ओर देखने लगे ।

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