सड़क
*******
सड़क साक्षी नहीं
भागीदार है
बदलते समय का
वक्त के कदमों के निशान
मौजूद हैं सड़क के वक्ष पर
बीहड़़ में बने रास्ते हों
या गाँवों की पगडंडियाँ
साफ सुने जा सकते हैं
समय के पदचाप
घोड़ों के टाप
हाथियों के चिग्घाड़
तलवारों की टंकार
तोपों की गर्जन
हारती - जीतती रियासतें
सियासत की क्रूर - जहरीली हँसी
मासूम बच्चों की सिसकियाँ
बेबस औरतों के करुण क्रंदन
सब दर्ज हैं
सड़क के सीने में
कभी रक्तरंजित
कभी जल प्लावित
टूटती - बिखरती
फिर से संवरती
बस्तियों को बस्तियों से
नगरों को नगरों से जोड़ती
सभ्यता - संस्कृति के विकास का
सदियों रही है वाहक
ऊँचे पहाड़ों से
घने जंगलों से
सुनसान घाटियों से
मनोहर वादियों से
सबसे हैं इसके अटूट रिश्ते.
तवारीख गवाह है
सड़क के सीने से उठे
असंख्य झंझावातों का
टूट कर गिरते बड़े बड़े तख्तों का
उछलते हवा में अजेय (?) ताजों का
मिट्टी में मिलते उन निजामों का
जिनके साम्राज्य में
नहीं होता था सूरज कभी अस्त
उनकी पस्ती , खोई सरपरस्ती भी
दर्ज हैं काल के कपाल पर.
जब - जब लहराई है सड़क
बनकर करोड़ों मुठ्ठियाँ
सारी धरती , सारा आकाश
थर्रा उठे हैं विरोध की आवाज से
कसा है नकेल सड़क ने
जब भी तोड़ी है मर्यादा संसद ने
कई बार खौफजदा हो
भागा है तानाशाह तहखाने में
किया है आत्महत्या
तवारीख इसका भी गवाह है.
उन्हें खूब है अहसास
सड़क की शक्ति का
तभी तो रची है साजिश
सड़क को खामोश रखने की ,
घरों को ही बना डाला है कैदखाना
जहाँ स्वेच्छा से हैं सभी कैद
और वे
मदमस्त हाथी की तरह रौंद रहे हैं
उस संविधान को
जिसकी शपथ लेकर ही
हुए थे तख्तनशीन
मोड़ रहे हैं विकास की दिशा
बदल रहे हैं
सड़क के हक में बने सारे ही कानून
पर,समय है साक्षी
कि सड़क नहीं रह सकती
यूँ खामोश
वह करेगी पर्दाफाश
इनकी साजिश का
फिर से होगा दांडी मार्च
संविधान बचाओ आंदोलन
छिड़ेगा जंग हक - हकूक के लिए
तूफान में हुई ध्वस्त सड़क
बन रही है , संवर रही है
हो रही है तैयार
एक लंबे संघर्ष के लिए
सड़क फिर एक दिन घेरेगी संसद .
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सड़क साक्षी नहीं
भागीदार है
बदलते समय का
वक्त के कदमों के निशान
मौजूद हैं सड़क के वक्ष पर
बीहड़़ में बने रास्ते हों
या गाँवों की पगडंडियाँ
साफ सुने जा सकते हैं
समय के पदचाप
घोड़ों के टाप
हाथियों के चिग्घाड़
तलवारों की टंकार
तोपों की गर्जन
हारती - जीतती रियासतें
सियासत की क्रूर - जहरीली हँसी
मासूम बच्चों की सिसकियाँ
बेबस औरतों के करुण क्रंदन
सब दर्ज हैं
सड़क के सीने में
कभी रक्तरंजित
कभी जल प्लावित
टूटती - बिखरती
फिर से संवरती
बस्तियों को बस्तियों से
नगरों को नगरों से जोड़ती
सभ्यता - संस्कृति के विकास का
सदियों रही है वाहक
ऊँचे पहाड़ों से
घने जंगलों से
सुनसान घाटियों से
मनोहर वादियों से
सबसे हैं इसके अटूट रिश्ते.
तवारीख गवाह है
सड़क के सीने से उठे
असंख्य झंझावातों का
टूट कर गिरते बड़े बड़े तख्तों का
उछलते हवा में अजेय (?) ताजों का
मिट्टी में मिलते उन निजामों का
जिनके साम्राज्य में
नहीं होता था सूरज कभी अस्त
उनकी पस्ती , खोई सरपरस्ती भी
दर्ज हैं काल के कपाल पर.
जब - जब लहराई है सड़क
बनकर करोड़ों मुठ्ठियाँ
सारी धरती , सारा आकाश
थर्रा उठे हैं विरोध की आवाज से
कसा है नकेल सड़क ने
जब भी तोड़ी है मर्यादा संसद ने
कई बार खौफजदा हो
भागा है तानाशाह तहखाने में
किया है आत्महत्या
तवारीख इसका भी गवाह है.
उन्हें खूब है अहसास
सड़क की शक्ति का
तभी तो रची है साजिश
सड़क को खामोश रखने की ,
घरों को ही बना डाला है कैदखाना
जहाँ स्वेच्छा से हैं सभी कैद
और वे
मदमस्त हाथी की तरह रौंद रहे हैं
उस संविधान को
जिसकी शपथ लेकर ही
हुए थे तख्तनशीन
मोड़ रहे हैं विकास की दिशा
बदल रहे हैं
सड़क के हक में बने सारे ही कानून
पर,समय है साक्षी
कि सड़क नहीं रह सकती
यूँ खामोश
वह करेगी पर्दाफाश
इनकी साजिश का
फिर से होगा दांडी मार्च
संविधान बचाओ आंदोलन
छिड़ेगा जंग हक - हकूक के लिए
तूफान में हुई ध्वस्त सड़क
बन रही है , संवर रही है
हो रही है तैयार
एक लंबे संघर्ष के लिए
सड़क फिर एक दिन घेरेगी संसद .
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