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चैनल नं - 2

...... चैनल नंबर - 2 ........

" इस साल एक बात बहुत ही चिंतित करने वाली हो रही है ...।"
" वह क्या ...? "
" कोरोना से होनेवाली मौतों में सर्वसाधारण के साथ साहित्यकारों,कलाकारों,पत्रकारों (पत्तलकारों नहीं), बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों , डॉक्टरों आदि के नाम बहुतायत में हैं । "
" हाँ , सो तो है ...।"
" कभी सोंचा नहीं कि ऐसा क्यों हो रहा है ...? "
" नहीं... ऐसा क्यों हो रहा है ? "
" सब चैनल नंबर - 2 का चक्कर है ...।"
" मतलब....?? "
" चैनल नंबर - 1से अस्पताल जाने पर बेड, ऑक्सीजन,वेंटिलेटर और दवाइयाँ सब अपर्याप्त  हैं ...। "
" और चैनल नंबर - 2  से....? "
" जब नंबर ही  2 है , तो कहना क्या है.....सबकुछ पहले से आरक्षित है ।  पिछली बार वे अचेत थे , इस बार सचेत हैं । बारात आने के पहले ही पान पराग की तैयारी हो चुकी है ...। धड़ल्ले से आपदा को अवसर में बदल रहे हैं ...। "
" बकवास बंद करो.....!!! "
" लो , बंद कर दिया जी ! सच्ची बात कड़वी होती ही है ..। "

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मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र

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