आस
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जीवन के एक सिरे पर है जन्म
तो दूसरे सिरे पर मृत्यु
पर , डोर की लंबाई
है सर्वथा अज्ञात .
इस अनोखे नीले ग्रह के
सारे ही प्राणी शायद
इस बात से हैं बाखबर
अतः , न तो वे
अतिशय संचय करते हैं
और न ही किसी का शोषण .
किंतु ,
इसी अनोखे नीले ग्रह पर
एक प्राणी है ऐसा भी
जो अक्सर ही रहता है
इस बात से बेखबर
और इसीलिए
संचय और शोषण की
उसकी प्रवृत्ति
असीमित ही नहीं
हो जाती है कभी कभी
विध्वंसकारी भी .
पर , यह भी है सर्वविदित
कि इस अनोखे नीले ग्रह पर
एकमात्र यही प्राणी
है चिंतनशील और विवेकशील
तब बंध जाती है एक आस
एक न एक दिन होगा अंत
अतिशय संचन का
निर्मम शोषण का .
---- कुमार सत्येन्द्र
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