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मनुआ - 59

मनुआ - 59

एक्जिट पोल ने जिन करोड़ों लोगों को भौंचक कर दिया है, उनमें मनुआ भी है। मिलते ही पूछा, " बाबूजी! क्या आप इस एक्जिट पोल को सही मानते  हैं? "
" गलत मानकर ही हम क्या कर लेंगे, मनुआ? गोदी मीडिया ने पिछले कई घंटों से अपने सुनहरे परदे पर इतनी बार इसे चलाया है कि करोड़ों लोग कनविंस हो चुके हैं। "
" परंतु, इससे सच्चाई तो नहीं बदल जाएगी, बाबूजी  ! "
" झूठ और हेराफेरी पर सच और सही के मुहर तो लग जाएंगे , मनुआ! गिनती और परिणामों की घोषणा में की जानेवाली धांधली पर परदा तो पड़ जाएगा। लोग कहेंगे कि यह तो एक्जिट पोल में ही बता दिया गया था। वैसे, हमें 4 जून का इंतजार करना चाहिए, जो भी है, सामने आ जाएगा । "
" लेकिन, गिनती के दिन पूरी सतर्कता बरतनी होगी, बाबूजी ! वरना, यह सरकार प्रशासन से मिलकर खेला कर देगी। " 
दूर से आते हुए पांडे तक शायद मनुआ की आवाज पहुँच चुकी थी। उसने हंसते हुए मनुआ से पूछा, " कैसा खेला मनुआ  ? किसकी बात कर रहे हो  ? "
मनुआ ने उसके सवाल का जवाब न देकर प्रति प्रश्न किया, " का बात है, पांडे भइया! बड़ी चहक रहे हो? "
" काहे न चहकें, मनुआ? कल जे एक्जिट पोल हुआ, ऊ न सुना का  ?  साहेबे परधानमंत्री रहेंगे। "
" त दूसर कोई कैसे बन जाएगा, पांडे भइया! अब तो साहेब ने दुनिया को बता ही दिया है कि ऊ कउनो महमूली आदमी नहीं हैं .....अवतार हैं, अवतार। " 
" अरे, इहो में कउनो शक है का ? अरे, हमलोगों ने तो पहिले ही से मान लिया है कि ऊ अवतारी पुरुष हैं। "
" ठीके बोले, भइया! ऊ जे भाखा बोलते हैं , कोई अवतारिए पुरुष बोल सकता है। आउर, झूठ का तो समझिए कि झमाझम बारिसे होती है...। "
 बीच में ही बात काटते हुए पांडे बोला, " अरे, चुप रहो। चान पर थूके से थूक अपने मुंह पर गिरता है। जिसको पूरा संसार नेता मानता है, उसके बारे में....... ठीके कहते हैं कि घर के जोगी जोगिरा, बाहर के जोगी सिद्ध। "
" हाँ, भइया! ठीक ही कहा आपने। ई महोदय जोगिए लाइक हैं। लेकिन, अप्पन लोगों ने उनको परधानमंत्री बना दिया है। अजब - गजब भेष धारण करके फोटू खिंचवाते रहते हैं। भइया! इसमें तो कोई शक ही नहीं कि दुनिया में ई एके पीस हैं। " --- कहकर मनुआ ठठाकर हंस दिया । मुझे भी हंसी आ गई। हमारी हंसी ने पांडे पर गजब का कहर ढा दिया। उसका चेहरा सूर्ख लाल हो गया।
 बुरी तरह चिढ़ते हुए कहा, " कर लो हंसी - ठिठोली...उड़ा लो मजाक....अबकी बार आएंगे न तो सब हंसी - मजाक तू सब के पिछ.....में घुसेड़ देंगे । टुकड़े - टुकड़े गैंग और अरबन नक्सलियों को तो वो पाठ पढ़ायेंगे कि नानी याद आ जाएगी । "
" का भइया, इतना नाराज हो गए! अरे, 4 जून के लिए गुस्सा और आंसू बचा के रखिये, बहुत काम आएंगे । "
" हम नहीं, तुमलोग रोओगे मनुआ, तुमलोग.... इंडी ठगबंधन वाले .... तुमलोग बुरी तरह हार रहे हो। हुंह! बड़ा चले हैं जातीय जनगणना कराने.... हिन्दू धर्म को जाति के नाम पर बांटने। " 
" ई तो होके रहेगा, भइया! जेकर जेतना भागीदारी, ओकर ओतना हिस्सेदारी। अब ऊ जमाना गया, जब दस परसेंट नब्बे परसेंट पर राज करता था। जिसको आप लोग पपुआ कहते थे न, उसने ऐसा पासा फेंका है कि साहेब चारो खाने चीत हो गए हैं। सुना है कि नही पांच न्याय की बात ?  जब साहेब को कुछो समझ में नहीं आया तो लगे भैंस, मंगलसूत्र, मटन, मछली, मुसलमान और मुजरा करने.....। "
" दुर बुड़बक  ! तू अभी बच्चा है। साहेब ने कौन सी चाल चली है, तू नहीं समझोगे। उनका नारा एकदम सही साबित होने जा रहा है --- अबकी बार, चार सौ पार। " --- विजयी भाव से कहते हुए पांडे उठा और चल दिया। मनुआ मेरी ओर देखकर मुस्कुराने लगा। 



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