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नाविक की डायरी

साल 1973 । महीना अप्रैल । ग्रामीण परिवेश से एकाएक अंग्रेजों की विरासत ढो रही नौसेना में दाखिला। अंग्रेजी की निहायत नई शब्दावलियों से परिचय। कमांड के लिए उद्घोषित शब्दों का शाब्दिक या परिभाषित अर्थ भले न बताया गया , उनके अनुसार ऐक्शन पहले ही दिन बता दिया गया। मशीन की तरह हम उन आदेशों या निर्देशों का पालन करते। कुछ बानगी यहाँ प्रस्तुत है --- " हैंड्स कॉल " यानि " जवान जागो " । " हैंड्स टू ब्रेकफास्ट " यानि " जवान नाश्ता करो " । " हैंड्स फॉल इन ऑन अपर डेक फॉर पी टी " यानि " जवान व्यायाम के लिए ऊपरी तल पर पंक्ति बनाओ " । " पाइप डाऊन " यानि " " बत्तियां बुझाकर सो जाओ " , इत्यादि। बाद में जाना कि हम नाविकों को अंग्रेज अफसर मनुष्य नहीं बल्कि काम करनेवाले " हाथ " मानते थे, इसलिए वे हमारे लिए "हैंड्स" शब्द का प्रयोग करते थे और आजादी के वर्षों बाद तक वही शब्दावली प्रचलन में रही, जबकि हम "हैंड्स" से एक स्वतंत्र देश के नागरिक बन चुके थे । ( शायद अब भी हो। 1983 के फरवरी में मैं सेवा मुक्त हो गया ) कल जब मैं " Left World " द्वारा प्रकाशित पुस्तक " Reading Capital To Smash Capitalism " पढ़ रहा था तो विजय प्रशाद के आलेख में अचानक ही इस " हैंड्स " शब्द से मुठभेड़ हो गया।

 .......Each of these sensitive writers was shocked by the great violence done to the communities of workers, working long hours, brutalised by the speed of factory production, inhaling the dust of cotton and coal, incapable of building lives but reduced now to labour, " hands" as they were known. 

" पाइप डाऊन " का अर्थ जब अपने एक सिनियर से पूछा तो पता चला कि रात्रि दस बजे के बाद " पाइप " , तंबाकू भर कर धुम्रपान करने वाला एक तरह का पाइप, पीने पर प्रतिबंध । जब पाइप की हल्की सूर्ख लाल सी चिनगारी की रोशनी भी नहीं होने देने का निर्देश हो तो अन्य किसी तरह की कोई रोशनी कैसे हो सकती है यानि बत्ती गुल करना ही " पाइप डाऊन " का निहितार्थ था। अंग्रेजों द्वारा बनाए गए " आर्टिकल्स ऑफ वार " तो और भी भयानक थे। ऑफिसर के आदेश की अवहेलना सहित अन्य तरह के कानूनों को तोड़ने पर जो सजा मुकर्रर की गई थी, वह तीन महीने की बामुशक्कत सजा से लेकर फांसी या गोली मारने तक की थी। किशोर मन इन्हें सुनकर ही कांप जाता था। अनुशासन बनाए रखने के लिए शायद इन्हें वांछित समझा गया था। 

       यादों के झरोखे से कुछ और अगले पोस्ट में। 


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