मनुआ - 61
जब मैं मनुआ के साथ बैठा हाल ही में रेलवे के विभिन्न जोन, डिवीजन एवं वर्कशॉप - कारखानों में मान्यता प्राप्ति के लिए हुए चुनाव में लाल झंडा यूनियनों की भारी जीत की चर्चा कर ही रहे थे कि पांडे आ धमका। इससे पहले कि वह कुछ बोलता मनुआ ने उसे प्रणाम करते हुए पूछा -- " का पांडे भइया , ऊ खुशखबरी सुने या नहीं? "
" कौन खुशखबरी .... संसद में मोदी जी के जोरदार भाषण वाली का ? "
" अरे नहीं भइया, रेलवे में यूनियनों के लिए हुए चुनाव के परिणाम वाली खबर....। "
" दूर बुड़बक, ई छोट - मोट चुनाव के जीत - हार से मोदीजी को कौनो फरक नहीं पड़ने वाला है , समझे। अरे, विधानसभा या संसद के चुनाव होते तो और बात होती । खैर, छोड़ो ई सब , यह बताओ कि उनके 11 संकल्पों को सुना कि नहीं ? "
" सुना भइया, जरूर सुना। बहस तो संविधान पर हो रही थी। किंतु, हमारे विश्वगुरु प्रधानमंत्री ने संविधान पर न बोलकर नेहरू - पुराण और कांग्रेस - पुराण सुनाकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। "
" अरे, संकल्पवा सुना कि नहीं ? "
" सुना भइया, पूरा तो नहीं याद है। पर, दू ठो ठीक से याद है। एक ठो भ्रष्टाचार मिटाने वाला और दूसरा परिवारवाद खत्म करने वाला। "
" सुना न ! और जान लो ई मोदी के संकल्प हैं ....। "
" लेकिन पांडे भइया, जब मोदीजी भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रहे थे तो गौहाटी में हिमंता विश्व शर्मा, कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी, मुंबई में अजित पवार, एकनाथ शिंदे खिलखिलाकर हंस रहे थे और जब परिवारवाद को जड़ से खत्म करने की बात कर रहे थे तो उनके पीछे बैठे रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर, ज्योतिरादित्य सिंधिया आदि मंद - मंद मुस्कुरा रहे थे। "
" तुम तो लगता है कि मोदीजी के विरोध में अंधा हो गया है। अरे, कभी तो सकारात्मक ढंग से सोचो। "
" भइया, मैं तो हमेशा सकारात्मक ही सोचता हूँ। आप ही ने सच्चाई से मुंह मोड़ रखा है । अब मोदी - भक्ति छोड़िए भइया, देश को बर्बादी से बचाने की लड़ाई में शामिल हो जाइए। "
" ई लो, जब देश विकास की नई - नई ऊंचाइयां छू रहा है तो तुम इसे बर्बादी कह रहे हो.....? " -- कहते हुए पांडे चला गया। मनुआ ने मेरी ओर देखकर मुस्कुरा दिया।
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