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धूर चटा द


मिलजुल के औकात बता द
इनका अबकी धूर चटा द

अइसन मौका फिर न मिलतो
नानी अबकी याद दिला द

कहलन का आ कयलन का हे
आव इनका याद दिला द

थोथून डुबा डुबा के खयलन
दिन में इनका चान दिखा द

शिच्छा के चौपट कर देलन
आव इनका पाठ पढ़ा द

करतब बड़ दिखलवलन पल्टू
अब इनका ऐनक दिखला द

सब दिन सहल कबतक सहब ?
अब तो अप्पन हाथ दिखा द

मिलजुल के औकात बता द
अबकी इनका धूर चटा द

---- कुमार सत्येन्द्र










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