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मनुआ - 66

 मनुआ - 66
      नोएडा के मजदूरों के समर्थन में सीटू द्वारा आयोजित प्रदर्शन एवं प्रतिरोध सभा से लौटकर मैं और मनुआ देश की वर्त्तमान स्थिति पर चर्चा कर ही रहे थे कि पांडे आ पहुँचा। उसने कहीं से एपस्टिन का नाम सुन लिया था, सो उसने आते ही मनुआ से पूछ दिया -- " अरे मनुआ! ई एपस्टिन वाला मामला का है , रे  ? बड़ी बबाल मचा हुआ है। "
" छोड़ो भइया, ऊ ससुरा का नाम सुनके मन बहुते खराब हो जाता है। पद, पैसा और पावर के लालच में आदमी इतना भी गिर सकता है, सोंचिए के रोंगटा खड़ा हो जाता है....! "
" अब तुम लगा बुझौनिया बुझाने  ! ......अरे, जानता है तो पूरा बताओ .....न तो छोड़ दो...! " पांडे ने मनुआ को बीच में ही रोक दिया।
" अब उसके बारे में का बताएं, भइया  ! ऊ एक ठो अमेरिकन पूंजीपति था। ससुरा मानव तस्करी करता था, खासकर छोटी - बड़ी बच्चियों की....बहुत रसूखदार आदमी था, भइया ! "
"  तस्कर और रसूखदार.... !! "
" हाँ, भइया  ! बड़े - बड़े पूंजीपतियों, व्यापारियों, वैज्ञानिकों से तो उसके ताल्लुकात थे ही, कई देशों के मंत्रियों और प्रधानमंत्रियों तक उसकी पहुँच थी....। "
" का कह रहे हो, मनुआ  ? ऐसा कैसे हो सकता है  ! आखिर उसके पास वो कौन सी चीज थी जो उसने इतने बड़े बड़े रसूखदारों को साध रखा था ? "---- पांडे को विश्वास नहीं हो रहा था। उसने जिज्ञासा वश पूछा।
" धार्मिक अंधविश्वास, धार्मिक पाखंड.....। "
" हम जानते थे कि तुम इसमें धर्म को जरूर लाओगे। अरे, कोई भी धर्म गलत - सलत काम करने को नहीं कहता है, समझे ! "
धर्म का नाम सुनते ही पांडे ऐसे बिदका, जैसे लाल कपड़ा देखकर......।
मनुआ ने मुस्कुराते हुए कहा -- " हमने धर्म कब कहा भइया ! हमने तो धार्मिक अंधविश्वास....। "
" अच्छा... ठीक है.... ठीक है... किस धर्म से जुड़ा हुआ ई अंधविश्वास  ? " , पांडे ने बीच में ही बात काटते हुए पूछा।
" यहूदी.....! "
"  हम जानते हैं कि तुमलोगों का टार्गेट आजकल दो ही धर्म तो है, एक अपना हिन्दू धर्म और दूसरा यहूदी...! " --- पांडे ने मनुआ की बात उसके मुंह से छीनते हुए कुछ रोष के साथ कहा ।
" आप तो गजबे करते हैं, भइया  ! पूरी बात सुने वगैर ही रिएक्ट कर जाते हैं। अरे, ई जेफ्रीन एपस्टिनवा कोई मामूली ठग नहीं था, भइया , नर पिशाच था.... पूरा खूंखार और हद दर्जे का क्रूर। जैसा कि जांच से पता चला है, इसने एक टापू पर एक भव्य इमारत बना रखी थी और उसके अंदर कनानी देवता मोलोच की मूर्ति स्थापित कर रखी थी.. जो भक्तों की इच्छा पूर्ति के एवज में मासूम बच्चों की बलि लेता था...।"
" रुको मनुआ, पहले हमको इस देवता के बारे में बताओ । आखिर कौनो धर्म ग्रंथ में इसका जिकर तो होगा ही...! ", पांडे ने मनुआ को रोकते हुए प्रश्न किया।
" है न भइया  ! जानकार कहते हैं कि इस देवता का उल्लेख यहूदी और ईसाई धर्म ग्रंथों में है । अच्छे मौसम और अच्छी खेती के लिए इस देवता को पूजा जाता था। पर , इसके लिए इस देवता को मासूम बच्चों की बलि देनी पड़ती थी.........पुराने समय के ग्रंथों में इसकी पूजा का काफी उल्लेख मिलता है .....लेकिन पूजा के क्रूर तरीकों के कारण इसकी पूजा बाद में बंद कर दी गई....इसी देवता की मूर्ति एपस्टिन के टापू में स्थापित थी.....सुना है कि अपनी इच्छा पूर्ति के लिए पढ़े - लिखे  विद्वान लोग, बड़े बड़े अमीरजादे, कॉरपोरेट कंपनियों के मालिक, राजनीति में ऊंचे - ऊंचे पदों पर काबिज सत्ताधारी  इस  देवता के आगे मासूम बच्चों की बलि देते थे......। "
" का बात करते हो, मनुआ  ? मन भिनक गया रे! अच्छा ई बताओ कि आखिर ई राज खुला कैसे ? "
" बोला न कि एपस्टिनवा बहुते पहुंचा हुआ चीज था , भइया !..... उसके कई तरह के काले और सफेद गोरख धंधे थे, जिसमें एक मानव तस्करी भी था। जब वह पकड़ा गया तो उसके सारे ईमेल की जांच हुई, जिसके लाखों पन्ने हैं और उसमें हजारो फोटो हैं .... उसी से तो मालूम हुआ कि वहाँ कौन कौन जाता था और वहाँ क्या क्या होता था। "
" क्या -  क्या होता था ...? कुछ तो बताओ मनुआ  ! "
" नहीं भइया, उन दुष्कर्मों, जघन्य - वीभत्स कुकृत्यों का जिकर करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है... छोटी - छोटी बच्चियों के साथ अमानुषिक व्यवहार, कुछ मासूमों की बलि के बाद उन्हें आग में भूनकर.......! "
" राम - राम! राम - राम! ......बस करो, मनुआ  ! इसके आगे अब हम नहीं सुन सकते। ई बताओ कि ऊ राक्षस अभी है कहाँ ? "
" उसे पकड़ने के बाद जेल में रखा गया था, जहाँ उसने आत्महत्या कर लिया....। "
" आत्महत्या कर लिया कि........ खैर, छोड़ो उसकी बात। अब ई बताओ कि उस आग की आंच हमारे देश तक तो नहीं पहुंची है न  ? "
" नहीं, भइया! ऐसा कैसे हो सकता है। एपस्टिनवा के फाइल में अपने यहाँ के भी एक बड़े पूंजीपति का नाम है और एक उच्चाधिकारी का भी जो अभी केंद्र सरकार में मंत्री है.....। "
" हम जानते थे कि तुम हमरे मोदीजी की सरकार को जरूर लपेटेगा.... वैसे सुना है कि ट्रंपवा के कई फोटो हैं और इसी लपेटा से ध्यान हटाने के लिए ऊ ईरान के साथ युद्ध छेड़े हुए है ? "
" का पता, भइया कि कौन का - का खेल खेल रहा है। हाँ, इतना जरूर कहूँगा कि पूंजीवाद ने मुनाफे के चक्कर में पूरी पृथ्वी को ही संकट में डाल दिया है। अगर उस फाईल की बात को सच माने तो कोरोनवा भी इन्हीं लोगों ने पैदा किया था और वैक्सीनवा भी.....। "
" अच्छा, तो अब तुम्हारा भाषण शुरू हो गया....अब तू ऊ का कहते हैं, शोषण - पोषण पर लंबा लेक्चर देगा.... ई बेवस्था को बदलने की बात कहेगा.......लेकिन, मेरे पास तुम्हारा बकवास सुनने का समय नहीं है.. समझे ! " -- कहते हुए पांडे चल दिया। मनुआ ने मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा और कहा ---- " बाबूजी  ! ई कभी नहीं सुधरेंगे  । "
" सुधरेंगे, मनुआ  ! वक्त सबको सुधार देगा । यह अलग बात है कि तब तक हमारा बहुत कुछ बहुमूल्य नष्ट हो चुका होगा। "
                       --- कुमार सत्येन्द्र

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